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💢साप्ताहिक वीडियो💢न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भीलवाड़ाPublished by:हिमांशु प्रियदर्शीUpdated Sat, 11 Oct 2025 11:38 PM IST
️रिसीव कमाई,संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर।Published by:Krishan SinghUpdated Mon, 12 Jan 2026 12:44 PM IST
शेयर कलेक्ट, विस्तारFollow Usमध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह की लहार स्थित बहुचर्चित कोठी से जुड़ा मामला सामने आया है। इस प्रकरण पर चल रही सुनवाई में हाईकोर्ट ने डॉ. गोविंद सिंह की याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने साफ किया कि इस विवाद की सुनवाई का अधिकार सिविल न्यायालय को है और राजस्व विभाग द्वारा की गई नापतौल को सही ठहराया गया है।
बांका जिले के चमरैली गांव से रिश्तों को शर्मसार कर देने वाला ऑनर किलिंग का सनसनीखेज मामला सामने आया है। प्रेम प्रसंग और सामाजिक बदनामी के भय में एक अधिवक्ता पिता और उसके बेटे ने मिलकर अपनी ही नाबालिग बेटी/बहन की गला रेतकर निर्मम हत्या कर दी। शनिवार की सुबह गांव के नहर से किशोरी का रक्तरंजित शव मिलने के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। पुलिस जांच में यह साफ हो गया है कि हत्या किसी बाहरी व्यक्ति ने नहीं, बल्कि घर के अंदर ही अंजाम दी गई। पुलिस ने मामले का खुलासा करते हुए इसे ऑनर किलिंग करार दिया है।
सारMP:छतरपुर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र में दुल्हन अपने पिता व कथित गुंडों संग ससुराल पहुंची। सास-ससुर से मारपीट कर दहेज की बाइक घसीटते ले गई। मामले को लेकर पुलिस जांच में जुटी है।
साररायगढ़ निवासी अंश श्रीवास्तव (17 वर्ष), पिता अमित श्रीवास्तव, लगभग 15 दिन पहले जेईई की परीक्षा देने के लिए जगदलपुर अपने ननिहाल आया था। उसकी परीक्षा मनमाफिक नहीं गई। इससे आहत होकर वह घर से स्कूटी लेकर निकला और सुसाइड की बात लिखकर पिता और मामा को मैसेज भेजा। अब तक अंश लापता है।
वीआईपी इनवाइट, सारBihar:हादसे के बाद स्थिति इतनी भयावह थी कि ट्रक में फंसे दो शवों को निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। जिला प्रशासन की टीम और जेसीबी की मदद से शवों को बाहर निकाला गया और पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया गया।
कमाई
वाराणसी ब्यूरोUpdated Sat, 10 Jan 2026 12:56 AM IST
कमेंट स्टूडेंट, विस्तारFollow Usइंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों ने मध्यप्रदेश की जल गुणवत्ता जांच व्यवस्था की गंभीर पोल खोल दी है। इस घटना के बाद जांच की सुई सीधे लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग पर टिक गई है, जो प्रदेश में पेयजल और औद्योगिक जल की गुणवत्ता जांच का जिम्मा संभालता है। हैरानी की बात यह है कि प्रदेशभर में 155 प्रयोगशालाएं होने के बावजूद पूरे मध्यप्रदेश में सिर्फ तीन नियमित केमिस्ट पदस्थ हैं।







