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💢गोल्ड फ्री💢प्रदेश में संगठित अपराध का चेहरा अब तेजी से डिजिटल और अंतरराष्ट्रीय होता जा रहा है। पुलिस मुख्यालय में डीजीपी अजय सिंघल की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में खुलासा हुआ कि कई कुख्यात गैंगस्टर विदेशों में सुरक्षित बैठकर सोशल मीडिया और इंटरनेट कॉलिंग के जरिये पूरे अपराध नेटवर्क का संचालन कर रहे हैं।
️दैनिक ट्रांसफर,राजकीय उच्च विद्यालय चुवाड़ी में स्मार्ट सुविधाओं के साथ मिल रही अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा
गुरुवार को जिला मुख्यालय बीजापुर के हृदय स्थल जय स्तंभ में बस्तर के दिवंगत वरिष्ठ पत्रकार मुकेश चंद्राकर को पत्रकारों एवं जनप्रतिनिधियों ने विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत पत्रकार की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
ट्रांसफर मोबाइल, पुलिस हिरासत में सरपंच सहित तीनों आरोपी।- फोटो : संवाद
छात्रा हर्षिता सोनी की नहाते समय संदिग्ध मौत- फोटो : अमर उजाला
सारदो पार्षदों के पाला बदलते ही पंजाब पुलिस, पंजाब वाटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसरों की नींद खोल दी है। इस राजनीति के केंद्र में सबसे ऊपर उभर कर आए हैं आप के चंडीगढ़ प्रदेश के सह प्रभारी डॉ. सन्नी सिंह आहलुवालिया।
सारWeather Alert: मौसम विभाग ने बढ़ते ठंड को देखते हुए लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है। कहा कि सुबह और रात में गर्म कपड़े पहनें और ठंड से बचाव रखें। कोहरे के कारण वाहन चलाते समय लो बीम हेडलाइट का उपयोग करें और गति धीमी रखें।
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डिस्काउंट राजधानी भोपाल के नगर निगम संचालित स्लॉटर हाउस से जुड़े एक गंभीर मामले ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पशु चिकित्सक के प्रमाणपत्र के आधार पर करीब 26 टन मांस मुंबई भेजा गया था, जिसकी जांच में बाद में गोमांस होने की पुष्टि हुई है। हैरानी की बात यह है कि दस्तावेजों में इसे भैंस का मांस बताया गया था। जानकारी के अनुसार नगर निगम के पशु चिकित्सक द्वारा जारी प्रमाणपत्र के आधार पर मांस को स्लॉटर हाउस से बाहर ले जाने की अनुमति दी गई। दिसंबर 2025 के मध्य में जारी इस प्रमाणपत्र में यह उल्लेख किया गया था कि तय मानकों के अनुसार पशुओं का वध किया गया है और मांस मानव उपभोग के लिए उपयुक्त है। इसी आधार पर मांस को फ्रीज कर कंटेनरों में भरकर मुंबई रवाना किया गया। अब इस मामले में भोपाल नगर निगम की भूमिका ही सवालों के घेरे में हैं।
बीजापुर नगर की सबसे बड़ी और बहुप्रतीक्षित जरूरत बन चुकी बायपास सड़क आज भी केवल कागज़ों और फाइलों तक सीमित है। बीते 12 वर्षों से बीजापुर बायपास सड़क का प्रस्ताव सरकारी दफ्तरों में धूल खा रहा है, जबकि शहर की सड़कों पर हर दिन बढ़ता यातायात, भारी वाहनों का दबाव और दुर्घटनाओं का खतरा आम नागरिकों की परेशानी को लगातार बढ़ा रहा है।वर्ष 2012-13 के अनुपूरक बजट में शामिल यह बायपास परियोजना आज तक जमीन पर उतर नहीं सकी। तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और पूर्व वन मंत्री महेश गागड़ा द्वारा बायपास का शिलान्यास किया गया था। इसके बाद कांग्रेस सरकार के पाँच वर्ष और वर्तमान भाजपा सरकार के दो वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन निर्माण कार्य आज भी शुरू नहीं हो पाया।
ईज़ी, न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपालPublished by:आनंद पवारUpdated Mon, 12 Jan 2026 08:48 PM IST







