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💢पुराना सब्सक्राइब💢गडवार/चिलकहर। सरकार जहां एक ओर डिजिटल इंडिया और सुशासन का दावा करते है लेकिर ज़मीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। हालत यह है कि जन्म प्रमाणपत्र जैसे बुनियादी दस्तावेज़ को बनवाना में लोगों का एक से दो हजार रुपये खर्च करना पड़ रहा है। वहीं, तहसील व ब्लाक चक्कर काटना अलग से हो जा रहा है। लोगों का आरोप है कि जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए उनसे 1000 से लेकर 2000 रुपये तक की अवैध वसूली की जा रही है। कभी सर्वर डाउन, कभी बाबू साहब छुट्टी पर तो कभी दस्तावेज़ अधूरे बताकर वापस कर दिया जाता है। पीड़िता राजकुमारी देवी, ब्रजेश पांडेय, संतोष सिंह, पंकज गुप्ता आदि का कहना है कि दो महीने से दौड़ रहे हैं। हर बार कोई नई कमी निकाल देते हैं। आखिर में साफ़ बोल दिया गया कि 1500 रुपये दे दो, तभी बनेगा।
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अमेठी सिटी। जिला मुख्यालय गौरीगंज में दीवानी न्यायालय निर्माण का इंतजार समाप्त होने जा रहा है। 17 जनवरी को भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत वर्चुअल माध्यम से दीवानी न्यायालय का शिलान्यास करेंगे। यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश के जनपद चंदौली में आयोजित कार्यक्रम से वर्चुअल रूप में संपन्न होगा। इस अवसर पर प्रयागराज उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उच्च न्यायालय के अन्य न्यायमूर्ति की उपस्थिति संभावित है।
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हंसवर(अंबेडकरनगर)। बसखारी ब्लॉक की ग्राम पंचायत भूलेपुर और हंसवर में सड़क किनारे जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। स्थिति यह है कि एक स्थान पर मस्जिद से महज करीब दस मीटर की दूरी पर कूड़ा जमा है। इससे ग्रामीणों के साथ-साथ नमाज अदा करने आने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकीUpdated Sun, 11 Jan 2026 09:59 PM IST
ईज़ी, सारधाकड़खेड़ी गांव में एक 17 वर्षीय बेटे ने रास्ते में हुए विवाद के बाद अपने ही पिता की चाकू मारकर हत्या कर दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
बोनस गोरखपुर ब्यूरोUpdated Tue, 13 Jan 2026 01:05 AM IST
अयोध्या। सिविल लाइन स्थित गांधी पार्क में कांग्रेस पार्टी ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) से राष्ट्र पिता महात्मा गांधी का नाम हटाए जाने के विरोध में उपवास रखा। योजना के प्रारूप में किए जा रहे बदलावों के विरोध में एक दिवसीय उपवास रखा गया। जिला अध्यक्ष चेत नारायण सिंह ने कहा कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत की जीवनरेखा है। मनरेगा के प्रारूप में बदलाव और गांधी जी का नाम हटाने की मंशा यह दर्शाती है कि केंद्र सरकार की नीयत और नीति दोनों ही मजदूर-किसान विरोधी हैं।
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