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💢रिसीव इनवाइट💢सारBihar : समस्तीपुर में भू माफियाओं ने एक सेवा निवृत फौजी को फर्जी तरीके से कागजों में मृत घोषित कर उनकी जमीन हड़पने की कोशिश की थी। अब एक दूसरे शहर में 9 साल पहले मृत महिला को कागज में जिंदा कर दिया। इस कहानी में भी मकसद कुछ ऐसा ही है।
️वीडियो पैसे,न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भरतपुरPublished by:हिमांशु प्रियदर्शीUpdated Sat, 18 Oct 2025 11:03 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बूंदीPublished by:बूँदी ब्यूरोUpdated Fri, 05 Sep 2025 09:04 PM IST
ऐप वेरिफाई, विस्तारFollow Usछतरपुर जिले के बड़ामलहरा महाविद्यालय में कक्षाओं के भीतर रील बनाने कक मामला सामने आया है, जहां के मामले को गंभीरता से लेते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य (अंकुर तिवारी) ने त्वरित और सख्त कार्रवाई करते हुए संबंधित छात्राओं को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। साथ ही, समस्त छात्र-छात्राओं को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि भविष्य में इस प्रकार की अनुशासनहीन गतिविधि दोहराई न जाए।
सारकल देर रात चलती ट्रेन में कोच अटेंडेंट से हुए विवाद के बाद उसने सैन्य जवान पर चाकू से हमला कर दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
विस्तारFollow Usछत्तीसगढ़ के बिलासपुर रेल मंडल में एक बार फिर रेलवे प्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। दरअसल, कोटमी सोनार और जयरामनगर स्टेशन के बीच एक ही ट्रैक पर तीन ट्रेनें एक साथ नजर आने से हड़कंप मच गया। बताया जा रहा है कि एक यात्री ट्रेन के आगे और पीछे दो मालगाड़ियाँ थीं। यह देखकर कुछ यात्री घबरा गए और ट्रेन से उतरकर भागते हुए नजर आए।
विस्तारFollow Usछत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य कर्मचारियों को नई सौगात दी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रविवार को राज्य सरकार के कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी की घोषणा की। इस फैसले के बाद कर्मचारियों को अब मूल वेतन का 58 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिलेगा। इस बढ़ोतरी से प्रदेश के लगभग 3.9 लाख सरकारी कर्मचारियों को सीधा लाभ होगा।
दैनिक कमाई, संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुरUpdated Sun, 11 Jan 2026 11:48 PM IST
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विस्तारFollow Usबीजापुर में कांग्रेस नेता विमल सुराना ने शनिवार को एक प्रेस वार्ता में केंद्र की मोदी सरकार पर मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) में बड़े बदलाव कर गरीबों के काम करने और मजदूरी पाने के अधिकार को छीनने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पहले मनरेगा के तहत ग्रामीण परिवारों को काम की कानूनी गारंटी थी और मांग करने पर 15 दिनों के भीतर काम उपलब्ध कराना अनिवार्य था। लेकिन अब यह अधिकार समाप्त हो गया है और सरकार की मर्जी से काम मिलेगा।
रिसीव, न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपालPublished by:आनंद पवारUpdated Mon, 12 Jan 2026 11:22 AM IST







