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💢लाइक इनाम💢35 वर्षों से जंजीरों में जकड़ा है महेंद्र माली- फोटो : अमर उजाला
️रिसीव,सारकोतमा निवासी पूजा जैन का एमपीपीएससी परीक्षा में डीएसपी पद पर चयन हुआ है। वे वर्तमान में भोपाल में जिला शिक्षा अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। कार्य के साथ तैयारी जारी रखी और पति श्रेयांश जैन व परिवार से मिली प्रेरणा ने उनकी सफलता में अहम भूमिका निभाई।
छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में अवैध नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत कोतवाली पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने ट्रैक्टर-ट्रॉली से लगभग 5 लाख रुपये मूल्य का 106.60 किलो गांजा जब्त किया है। इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है, जबकि तस्करी में प्रयुक्त ट्रैक्टर-ट्रॉली भी जब्त की गई है।
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अमर उजाला नेटवर्क, भाटापाराPublished by:विजय पुंडीरUpdated Fri, 14 Nov 2025 11:03 AM IST
सारछत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के युवाओं के लिए एक बड़ी सौगात आई है। जिला प्रशासन अब प्रतिभाशाली युवाओं को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निःशुल्क कोचिंग और कैरियर मार्गदर्शन प्रदान करेगा।
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीPublished by:मार्केटिंग डेस्कUpdated Mon, 17 Nov 2025 06:08 PM IST
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ऐप इनवाइट वाराणसी ब्यूरोUpdated Mon, 12 Jan 2026 11:10 PM IST
भाटापारा में बुधवार से छत्तीसगढ़ की राजधानी में होने वाले अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैच को लेकर पूरे प्रदेश में हलचल तेज है। इसी बीच भाटापारा, जिसे मिनी बॉम्बे और सट्टे के गढ़ के नाम से जाना जाता है, एक बार फिर चर्चा में है। लंबे समय से शहर के नामचिन और रसूखदार सटोरिए भुमिगत हैं, लेकिन सूत्रों के अनुसार वे दूसरे शहरों से अब भी अपने सट्टे के कारोबार को संचालित कर रहे हैं।
कैश पैसे, 73 वर्ष बाद सरगुजा में पहली महिला जनजातीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का 20 नवंबर को आगमन होगा। द्रौपदी मुर्मू पहली महिला राष्ट्रपति है जो सरगुजा जिला के अंबिकापुर आएंगी। इसके पूर्व 1952 में प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद पंडों जनजाति की दशा का प्रत्यक्ष अध्ययन करने पहुंचे थे सरगुजा के पंडों नगर पहुंचे थे। उनकी इस यात्रा की स्मृति में आज भी सरगुजा में देश का एकमात्र ग्रामीण राष्ट्रपति भवन स्मारक मौजूद है।73 वर्ष बाद, सरगुजा एक बार फिर वही गौरवशाली क्षण जीने जा रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अंबिकापुर आगमन को लेकर उमंग और गर्व का वातावरण निर्मित है।जनजातीय समुदाय इस अवसर को अपने इतिहास और सम्मान से जुड़े नए अध्याय के रूप में देख रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि 1952 ने सरगुजा को राष्ट्रीय पहचान दी थी, और 2025 यह गौरव पुनः स्थापित करेगा।







