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श्रावण मास के अंतिम सोमवार को बाबा बैजनाथ शहरवासियों को दर्शन देने चांदी की पालकी में सवार होकर शाही ठाठ के साथ निकलेंगे। शाही सवारी के दिन तड़के तीन बजे मंदिर के पट खुलेंगे। 3.30 बजे तक गर्भ गृह सफाई होगी। 3.30 से 4.00 बजे तक बाबा बैजनाथ का पंचामृत स्नान होगा। 4ः30 से 5ः00 के मध्य ब्रह्ममुहूर्त आरती होगी। 5.00 से 7.30 बजे तक गर्भ गृह में बाबा बैजनाथ के दर्शन एवं पूजन कर सकेंगे। इसके पश्चात् गर्भगृह में प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। बाहर से ही दर्शन की व्यवस्था रहेगी। दोपहर 12ः30 बजे गर्भगृह में बाबा बैजनाथ का पूजन एवं आरती होगी। 1:00 से 1:15 बजे तक बाबा बैजनाथ को पुलिस द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा। 1:15 से 1:30 के मध्य बाबा बैजनाथ चांदी की पालकी में सवार होंगे।
विन, पश्चिमी राजस्थान की राजनीति एक बार फिर जिला सीमाओं के सवाल पर उबाल पर है। बाड़मेर और बालोतरा जिलों की सीमाओं में किए गए ताजा फेरबदल ने न सिर्फ प्रशासनिक ढांचे को झकझोर दिया है, बल्कि प्रदेश की राजनीति को भी आमने-सामने ला खड़ा किया है। कांग्रेस इस फैसले को जनविरोधी और राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रही है, जबकि भाजपा इसे संतुलित प्रशासन और विकास की दिशा में जरूरी कदम करार दे रही है।
बिधूना। मौसम का मिजाज लगातार बदलता नजर आ रहा है। ठंड के बीच अब दिन के तापमान में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। पारे में छह डिग्री सेल्सियस का उछाल आया है।
इलाहाबाद लोकसभा क्षेत्र के कांग्रेस सांसद उज्ज्वल रमण सिंह ने एसआईआर पर सवाल खड़े किए हैं। कहा कि 24 प्रतिशत मतदाताओं का नाम प्रयागराज में कट जाना चिंता की बात है। प्रेसवार्ता में उन्होंने कहा कि एक पार्टी को फायदा पहुंचाने के लिए उनके ज्यादा लोगों जोड़ा जा रहा है। विपक्ष के लोगों का नाम न जोड़े जाने की साजिश और षड़यंत्र की बू आ रही है। एसआईआर में बड़ी गड़बड़ी की जा रही है। सरकार के इशारे पर कार्य किया जा रहा है। शीतकालीन सत्र में चर्चा हुई लेकिन सरकार ने जब नहीं दिया। विश्वास लोकतंत्र की नींव को मजबूती देता है, लेकिन जनता का विश्वास डगमगा रहा है तो यह चिंता की बात है।
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विस्तारFollow Usमकर संक्रांति का पर्व, जो पारंपरिक रूप से खिचड़ी के बिना अधूरा सा लगता है, इस वर्ष एक विशेष संयोग के कारण अपने पारंपरिक स्वरूप में नहीं मनाया जा सकेगा। 14 जनवरी को मकर संक्रांति के साथ-साथ षटतिला एकादशी का भी पर्व पड़ रहा है, जो 19 वर्षों बाद ऐसा संयोग है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी के दिन चावल से बनी किसी भी सामग्री का सेवन वर्जित होता है।
दैनिक वॉच,







