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💢वीडियो💢विस्तारFollow Usछतरपुर जिला जेल में 22 वर्षीय आजीवन कारावास के कैदी ने जेल की छत से कूदकर आत्महत्या कर ली। मृतक कैदी शंकर प्रजापति को 376 पॉक्सो एक्ट के तहत घटना से महज 24 घंटे पहले ही आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। सजा से आहत होकर उसने यह खौफनाक कदम उठाया, जिससे जेल परिसर में हड़कंप मच गया।
️कैश,न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपालPublished by:आनंद पवारUpdated Sun, 11 Jan 2026 06:34 PM IST
अमर उजाला नेटवर्क, बेमेतराPublished by:Digvijay SinghUpdated Mon, 01 Dec 2025 02:25 PM IST
दैनिक सब्सक्राइब, विस्तारFollow Usबीजापुर जिले के नव-नियुक्त जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष लालू राठौर ने सोमवार को कांग्रेस भवन में विधिवत रूप से पदभार ग्रहण किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता, पदाधिकारी और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। पदभार संभालने से पहले, राठौर ने कांग्रेस नेताओं व कार्यकर्ताओं के साथ बस्तर की आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी की पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बीकानेरPublished by:प्रिया वर्माUpdated Wed, 17 Dec 2025 10:06 PM IST
खुर्जा में रविवार सुबह निकलते सूर्यदेव। संवाद- फोटो : संवाद
कलेक्ट सर्वे, जाति है कि जाती नहीं... बिहार के लिए हमेशा यह कहा जाता रहा है। चुनावों में तो खासकर। लेकिन, बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में नीतीश कुमार सरकार की वापसी के लिए मतदाताओं ने इन कहावतों को किनारे कर एकतरफा मतदान किया। परिणाम सामने है। यादव और मुस्लिम के नाम का समीकरण रखने वाली पार्टी बुरी तरह पराजित हुई। इसके साथ ही एक बात चर्चा में आ गई कि अरसे बाद बिहार विधानसभा एक खास जाति के दबदबे से बाहर निकल रहा है। इस बार विधायकों का जातीय समीकरण बहुत हद तक अलग है। दलित भी खूब हैं, सवर्ण भी मजबूत। देखिए, पूरा गणित।
विन रिसीव ग्वालियर के अधिवक्ता अनिल मिश्रा एवं उनकी टीम के खिलाफ दर्ज एफआईआर के विरोध में मंगलवार को भिंड जिले की लहार तहसील में अधिवक्ता संघ के बैनर तले जोरदार प्रदर्शन किया गया। अधिवक्ता बड़ी संख्या में जमा होकर लहार एसडीएम कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने विरोध दर्ज कराते हुए एसडीएम को ज्ञापन दिया। इस दौरान ग्वालियर पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।
नगर के भूड़ रोड पर भीम वाहिनी के कार्यकर्ताओं को मेरठ जाने से रोकती पुलिस। स्रोत: संगठन
बोनस सब्सक्राइब, विस्तारFollow Usसुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें एक न्यायिक अधिकारी की बर्खास्तगी को रद्द कर दिया गया था। आरोप है कि उक्त अधिकारी ने वर्ष 2018 में ट्रेन यात्रा के दौरान एक महिला सहयात्री के सामने पेशाब किया और यात्रियों के साथ नशे की हालत में दुर्व्यवहार किया। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने इस आचरण को “घृणित” और “चौंकाने वाला” बताते हुए टिप्पणी की कि ऐसे मामले में अधिकारी को बर्खास्त किया जाना चाहिए था।







