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💢कैश💢सारAnta By-poll 2025: अंता उपचुनाव में 80.32% मतदान दर्ज हुआ, जो पिछले चुनाव के बराबर है। त्रिकोणीय मुकाबले में कांग्रेस के प्रमोद जैन भाया, भाजपा के मोरपाल सुमन और निर्दलीय नरेश मीणा मैदान में हैं। नतीजे 14 नवंबर को घोषित होंगे।
️इनवाइट कलेक्ट,- प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक के पदों पर काउंसलिंग प्रक्रिया अटल उत्कृष्ट पीएमश्री जीआईसी अल्मोड़ा में सुबह दस बजे से।
जिले के घाटोल ब्लॉक में गुरुवार का दिन विधवा महिला देवु बाई के लिए उम्मीद और रोशनी लेकर आया। पिछले 14 साल से अंधेरे में जीवन गुजार रही देवु का घर आखिरकार बिजली की रोशनी से जगमगा उठा। पति की मौत के बाद तीन बच्चों की जिम्मेदारी उठाने वाली 50 वर्षीय देवु की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि वह साल 2011 के बाद बिजली का बिल नहीं चुका पाई और उसका कनेक्शन कट गया। तब से परिवार अंधेरे में रहने को मजबूर था।
अतिरिक्त कैश, अजमेर दरगाह परिसर में शिव मंदिर होने के दावे से जुड़े मामले की सुनवाई एक बार फिर टल गई है। शनिवार को सिविल कोर्ट में प्रस्तावित सुनवाई वकीलों के वर्क सस्पेंड के कारण नहीं हो सकी। अब कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख 21 फरवरी 2026 तय की है।
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जिले में नशे के नेटवर्क और मादक पदार्थों की सप्लाई पर नकेल कसने के लिए पुलिस और डीएसटी लगातार फील्ड में सक्रिय है। इसी सिलसिले में शुक्रवार रात शहर में एक सनसनीखेज मामला सामने आया, जहां फास्ट फूड की दुकान को सिगरेट-कबाब और बर्गर बेचने की आड़ में नशीले पदार्थों की बिक्री का अड्डा बना दिया गया था। संयुक्त कार्रवाई में पुलिस ने मौके से 2.74 किलोग्राम अवैध गांजा पाउडर बरामद करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
गडवार/चिलकहर। सरकार जहां एक ओर डिजिटल इंडिया और सुशासन का दावा करते है लेकिर ज़मीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। हालत यह है कि जन्म प्रमाणपत्र जैसे बुनियादी दस्तावेज़ को बनवाना में लोगों का एक से दो हजार रुपये खर्च करना पड़ रहा है। वहीं, तहसील व ब्लाक चक्कर काटना अलग से हो जा रहा है। लोगों का आरोप है कि जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए उनसे 1000 से लेकर 2000 रुपये तक की अवैध वसूली की जा रही है। कभी सर्वर डाउन, कभी बाबू साहब छुट्टी पर तो कभी दस्तावेज़ अधूरे बताकर वापस कर दिया जाता है। पीड़िता राजकुमारी देवी, ब्रजेश पांडेय, संतोष सिंह, पंकज गुप्ता आदि का कहना है कि दो महीने से दौड़ रहे हैं। हर बार कोई नई कमी निकाल देते हैं। आखिर में साफ़ बोल दिया गया कि 1500 रुपये दे दो, तभी बनेगा।
विज़िट पैसे, सारमहाराष्ट्र की राजनीति में ‘ठाकरे’ नाम केवल एक उपनाम नहीं, बल्कि एक विशिष्ट राजनीतिक सोच, पहचान और प्रभाव का प्रतीक रहा है। दशकों से यह नाम राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता आया है।
रिवॉर्ड्स पॉइंट्स
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ाUpdated Sun, 11 Jan 2026 10:49 PM IST
रिवॉर्ड्स, अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्याPublished by:भूपेन्द्र सिंहUpdated Sun, 11 Jan 2026 10:18 AM IST







