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️प्रीमियम डिस्काउंट,मछली का जाल निकालते समय तालाब में डूबा युवक, मौत- फोटो : अमर उजाला

गाजियाबाद ब्यूरोUpdated Sun, 11 Jan 2026 10:33 PM IST

अतिरिक्त रिवॉर्ड्स, न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपालPublished by:संदीप तिवारीUpdated Mon, 18 Aug 2025 08:44 PM IST

सारBihar : समस्तीपुर में भू माफियाओं ने एक सेवा निवृत फौजी को फर्जी तरीके से कागजों में मृत घोषित कर उनकी जमीन हड़पने की कोशिश की थी। अब एक दूसरे शहर में 9 साल पहले मृत महिला को कागज में जिंदा कर दिया। इस कहानी में भी मकसद कुछ ऐसा ही है।

- 5500 पुलिस कांस्टेबल की होनी है भर्ती, अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए टोल फ्री नंबर जारी

कैश टास्क,

वॉच चंडीगढ़। केंद्र और राज्य सरकार के प्रयासों के साथ-साथ फौजियों द्वारा स्कूलों और कॉलेजों में दी जा रही जानकारी के चलते अब युवा सेना के माध्यम से देश सेवा के लिए उमड़ने लगे हैं। चंडीगढ़ में एनडीए की तैयारी करवाने वाले इंस्टीट्यूट के रिटायर्ड फौजी अधिकारियों के अनुसार विदेशों से भारतीयों के डिपोर्ट होने जैसे मामलों ने भी युवाओं को सेना की ओर आकर्षित किया है।

विस्तारFollow Usमध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में इस साल चार दिन स्थानीय अवकाश के रूप में घोषित किए गए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग ने इसके लिए आदेश जारी कर दिया है। इन दिनों शहर के सभी सरकारी कार्यालय बंद रहेंगे। भोपाल में घोषित अवकाश में मकर संक्रांति, महानवमी और अनंत चतुर्दशी के साथ-साथ गैस त्रासदी की बरसी शामिल है। इन अवसरों पर सरकारी कामकाज प्रभावित रहेगा। आदेश के अनुसार, 14 जनवरी 2026, बुधवार को मकर संक्रांति के उपलक्ष्य में छुट्टी रहेगी। 25 सितंबर, शुक्रवार को अनंत चतुर्दशी और 19 अक्टूबर, सोमवार को महानवमी के दिन भी सरकारी दफ्तर बंद रहेंगे। वहीं, 3 दिसंबर, बुधवार को भोपाल शहर में गैस त्रासदी की बरसी पर भी सरकारी कार्यालय बंद रहेंगे। इस प्रकार, भोपाल के निवासियों को इस साल कुल चार दिन सरकारी कार्यालयों से संबंधित कामकाज में अवकाश रहेगा।

दैनिक सब्सक्राइब, भिवानी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत पढ़ाई बीच में छोड़ चुके ड्रॉपआउट बच्चों को दोबारा शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने के उद्देश्य से शिक्षा विभाग की ओर से 19 जनवरी तक सर्वे अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के रुझान सामने आने लगे हैं। सर्वे में पाया गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी दायरे में पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले बच्चों की संख्या अधिक है। इनमें विशेष रूप से प्रवासी मजदूर परिवारों और घुमंतू लोगों के बच्चे शामिल हैं।

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