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️ट्रांसफर गेट,भारत-पाकिस्तान संघर्ष पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप।- फोटो : अमर उजाला
नहर किनारे स्थित तालाब परिसर में मिले युवक के शव की गुत्थी को पुलिस और एसओजी, सर्विलांस सेल गंगानगर की संयुक्त टीम ने 48 घंटे में सुलझा लिया। हत्या के इस सनसनीखेज मामले में पुलिस ने वांछित को गिरफ्तार कर लिया है, जिसकी निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त ईंट का टुकड़ा भी बरामद किया गया है। पुलिस के अनुसार अपमान का बदला लेने के लिए आरोपी ने युवक की हत्या की थी।
वेरिफाई, अमर उजाला नेटवर्क, अंबिकापुरPublished by:अनुज कुमारUpdated Thu, 01 Jan 2026 04:24 PM IST
सारअक्सर निवेशक लार्ज, मिड और स्मॉल-कैप फंड्स के बीच चयन करने में भ्रमित रहते हैं। फ्लेक्सी-कैप फंड इस धर्मसंकट का एक प्रभावी समाधान है, जो एक ही जगह पर स्थिरता और ग्रोथ दोनों प्रदान करता है। आइए इस बारे में विस्तार से जानें।
रास्ते में खराब हुई एम्बुलेंस, मासूम ने दम तोड़ा- फोटो : अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालाघाटPublished by:बालाघाट ब्यूरोUpdated Sun, 30 Nov 2025 10:42 PM IST
डिस्काउंट, सारइलाहाबाद लोकसभा क्षेत्र के कांग्रेस सांसद उज्ज्वल रमण सिंह ने एसआईआर पर सवाल खड़े किए हैं। कहा कि 24 प्रतिशत मतदाताओं का नाम प्रयागराज में कट जाना चिंता की बात है।
डिपॉजिट संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठीUpdated Mon, 12 Jan 2026 12:19 AM IST
विस्तारFollow Us73 वर्ष बाद सरगुजा में पहली महिला जनजातीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का 20 नवंबर को आगमन होगा। द्रौपदी मुर्मू पहली महिला राष्ट्रपति है जो सरगुजा जिला के अंबिकापुर आएंगी। इसके पूर्व 1952 में प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद पंडों जनजाति की दशा का प्रत्यक्ष अध्ययन करने पहुंचे थे सरगुजा के पंडों नगर पहुंचे थे। उनकी इस यात्रा की स्मृति में आज भी सरगुजा में देश का एकमात्र ग्रामीण राष्ट्रपति भवन स्मारक मौजूद है।73 वर्ष बाद, सरगुजा एक बार फिर वही गौरवशाली क्षण जीने जा रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अंबिकापुर आगमन को लेकर उमंग और गर्व का वातावरण निर्मित है।जनजातीय समुदाय इस अवसर को अपने इतिहास और सम्मान से जुड़े नए अध्याय के रूप में देख रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि 1952 ने सरगुजा को राष्ट्रीय पहचान दी थी, और 2025 यह गौरव पुनः स्थापित करेगा।
बड़ा अर्न, अयोध्या। श्रीराम मंदिर के साथ अब राम ध्वज भी आस्था और पहचान का नया प्रतीक बनता जा रहा है। रामलला के दर्शन के बाद श्रद्धालु अपने साथ राम ध्वज ले जाना आस्था की पूर्णता मान रहे हैं। यही वजह है कि राम ध्वज अब सिर्फ एक धार्मिक ध्वज नहीं, बल्कि आस्था का ब्रांड बन चुका है। दुकानदारों के अनुसार रोजाना पांच हजार से अधिक राम ध्वज की बिक्री हो रही है।







