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💢रिवॉर्ड्स कूपन💢वाराणसी ब्यूरोUpdated Mon, 12 Jan 2026 01:45 AM IST
️छोटा मोबाइल,विस्तारFollow Usजिला अधिवक्ता संघ के चुनाव के परिणाम शनिवार को संपन्न हुए। वर्ष 2025-27 के लिए हुए इस चुनाव में कुल 935 में से 859 मतदाताओं ने वोट डाला। अधिवक्ता संघ के चुनाव परिणाम की गणना पूरी होने पर रात्रि करीब 3 बजे घोषित किए गए। अध्यक्ष पद पर शिवप्रताप सिंह चौहान (रिशु) ने 323 मत प्राप्त कर जीत दर्ज की जबकि सचिव पद पर अनिल कुमार द्विवेदी 285 मतों के साथ निर्वाचित घोषित किए गए।
सारभोपाल का एक अपराधी हाल ही में गुजरात के सूरत से गिरफ्तार किया गया है। उसकी गिरफ्तारी के साथ ही उसके जुर्म की पूरी कहानी सामने आई है। बॉलीवुड की फिल्म धुरंधर के किरदार के कामों से मिलते-जुलते काम करने वाला राजू ईरानी ऊर्फ आबिद अली ईरानी गैंग का सरगना है। गैंग के लोग आबिद को रहमान डकैत बुलाते थे। वह कई दिनों से फरार चल रहा था। 50 साल में कैसे ईरानी गैंग का वर्चस्व भोपाल समेत देश के 14 राज्यों में बढ़ा? ईरानी गैंग में ड्रग्स की रानी कौन हैं?आइए जानते हैं इन सब के बारे में...
छोटा विज़िट, सारहरियाणा पुलिस की सख्ती का असर दिखने लगा है। साल 2024 की तुलना में 2025 में फिरौती मांगने की वारदातों में 40 फीसदी कमी आई है। इसके अलावा पुलिस ने 9 टारगेटेड मर्डर की बड़ी साजिशों को समय रहते नाकाम करने का दावा किया है।
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इनवाइट कैश, मुख्यमंत्री कॉस्मो ट्रेड एंड बिल्ड फेयर एक्सपो 2026 के शुभारंभ कार्यक्रम में हुए शामिल- फोटो : अमर उजाला
इनवाइट विस्तारFollow Usराजधानी भोपाल के अमन कॉलोनी स्थित ईरानी डेरे से देशभर के 14 राज्यों में अलग-अलग तरह के वारदात को अंजाम देने के लिए आधा दर्जन गैंगों को संचालित करने वाला कुख्यात बदमाश राजू ईरानी उर्फ रहमान को भोपाल लाने के लिए पुलिस टीम सूरत में मौजूद है। रविवार देर रात तक उसे ट्रांजिट वारंट पर पुलिस भोपाल लाने की तैयारी में है। हालांकि रविवार को उसे सूरत की विशेष अदालत में प्रस्तुत किया जाएगा, इसके बाद ही आगे का निर्णय हो सकेगा।
विस्तारFollow Usजोहार छत्तीसगढ़ पार्टी प्रमुख अमित बघेल पर कथित हेट स्पीच का आरोप लगाते हुए गिरफ्तारी और पुलिस जांच की निगरानी समेत अन्य मांगें करते हुए हाईकोर्ट में याचिका लगाई गई थी। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि चल रही आपराधिक जांच में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता और न ही किसी आरोपी की गिरफ्तारी का निर्देश दिया जा सकता है। इसके अलावा जांच के तरीके या वरिष्ठ अधिकारी की निगरानी जैसे निर्देश देना आपराधिक जांच के माइक्रो मैनेजमेंट जैसा होगा, जो कोर्ट के दायरे में नहीं आता।
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