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💢वॉच कम्पलीट💢बीजापुर में कांग्रेस नेता विमल सुराना ने शनिवार को एक प्रेस वार्ता में केंद्र की मोदी सरकार पर मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) में बड़े बदलाव कर गरीबों के काम करने और मजदूरी पाने के अधिकार को छीनने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पहले मनरेगा के तहत ग्रामीण परिवारों को काम की कानूनी गारंटी थी और मांग करने पर 15 दिनों के भीतर काम उपलब्ध कराना अनिवार्य था। लेकिन अब यह अधिकार समाप्त हो गया है और सरकार की मर्जी से काम मिलेगा।
️कम्पलीट विथड्रॉ,सारBihar Vigilance Department: निगरानी विभाग पूरी यूनिट को हाईटेक बनाने की तैयारी कर रहा है। इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल टेक्नोलॉजी सेंटर बनाने का प्रस्ताव सरकार को भेज दिया गया है। जानिए पूरा मामला...
पैसे टास्क, विस्तारFollow Usभिंड जिले में मां ने नवजात की गला दबाकर हत्या कर दी। पति ने रोका तो उस पर भी हमला कर दिया, जिससे वह घायल हो गया। पुलिस ने आरोपी महिला को गिरफ्तार कर हत्या का मामला दर्ज किया है। मालनपुर के वार्ड क्रमांक 14 में की है। आरोपी उषा बघेल के पति जगन्नाथ सिंह बघेल ने बताया कि पत्नी पिछले कुछ दिनों से उस पर शक करती थी और आए दिन विवाद करती थी। गुस्से में आकर उषा ने बेटे की जान ले ली। जगन्नाथ सिंह बघेल उत्तर प्रदेश के ललितपुर के लाधवारी महुआ खेरा का रहने वाला है। भिंड में रहकर मजदूरी करता है।
विस्तारFollow Usबॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता और ‘हीमैन’ के नाम से मशहूर धर्मेंद्र का 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने आज अंतिम सांस ली, जिसके साथ ही हिंदी सिनेमा के एक महत्वपूर्ण और स्वर्णिम युग का अंत हो गया। उनके निधन की खबर फैलते ही फिल्म उद्योग, राजनीतिक जगत और करोड़ों प्रशंसकों में गहरा शोक छा गया।
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छात्र की हॉस्टल की छत से गिरकर मौत- फोटो : अमर उजाला
अतिरिक्त स्टूडेंट, न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बैतूलPublished by:बैतूल ब्यूरोUpdated Tue, 06 Jan 2026 07:29 AM IST
इनाम ऑनलाइन अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुरPublished by:अनुज कुमारUpdated Fri, 09 Jan 2026 12:07 AM IST
विस्तारFollow Usकभी खेतों की हरियाली से पहचाने जाने वाला झाड़सिरतोली गांव आज वीरान है। एक समय यहां 30 परिवार साथ रहते थे लेकिन अब पूरा गांव महज एक परिवार के छह लोगों की मौजूदगी पर टिका है। मूलभूत सुविधाओं की कमी ने लोगों को अपनी जन्मभूमि से दूर जाने को मजबूर कर दिया। रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य की तलाश में ग्रामीण हल्द्वानी, दिल्ली और तहसील-जिला मुख्यालयों की ओर पलायन कर गए।
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