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💢रिवॉर्ड्स💢विस्तारFollow Usजिले के देईखेड़ा थाना क्षेत्र की बाढ़ग्रस्त पंचायत रेबारपुरा के पंचायत सचिव से मारपीट के मामले में फरार मुख्य आरोपियों को पुलिस ने बुधवार को गिरफ्तार कर लिया। आमजन में आरोपियों का खौफ खत्म करने के लिए देईखेड़ा पुलिस ने उन्हें सुरक्षा घेरे में कस्बे के मुख्य बाजार से हाथ जकड़कर पैदल घुमाया।
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लॉग इन, विस्तारFollow Usइंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से 23 लोगों की मौत के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। सोमवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी खुद सड़कों पर उतरे और राजधानी भोपाल में पानी की हकीकत का रियलिटी टेस्ट किया। निरीक्षण के दौरान नलों से कीड़े युक्त दूषित पानी निकलता देख कांग्रेस ने नगर निगम और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। जीतू पटवारी ने दक्षिण-पश्चिम विधानसभा के वार्ड क्रमांक 25 (बाणगंगा क्षेत्र) का स्थल निरीक्षण किया। इस दौरान जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रवीण सक्सेना और नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष शबीस्ता जकी मौजूद रहीं। पटवारी ने कहा कि सीवर लाइन के समानांतर पेयजल पाइपलाइन बिछाई गई है, जिसके चलते नलों में गंदा और बदबूदार पानी पहुंच रहा है।
बदायूं। किसानों ने खेतों के चारों ओर लोहे के तारों से तारबंदी की हुई है, कुछ ने तो अपने खेत की मेड़ों पर लोहे के टिनशेड भी लगा रखे हैं, बावजूद इसके छुट्टा पशु इन्हें तोड़कर खेतों में घुस फसल नष्ट कर जा रहे हैं। मजबूरी में किसानों को भीषण सर्दी में खेतों में घूमकर और मचानों पर जागकर पहरा देना पड़ रहा है। खेत की रखवाली के दौरान छुट्टा पशु हमलावर भी हो जाते हैं, ऐसे में उन्हें अपनी जान का भी खतरा रहता है।
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोलीUpdated Sun, 11 Jan 2026 10:44 PM IST
अमर उजाला नेटवर्क, बेमेतराPublished by:अनुज कुमारUpdated Sat, 20 Dec 2025 10:48 PM IST
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दैनिक विज़िट चुराह (चंबा)। उपमंडल चुराह में किसानों को आधुनिक कृषि से जोड़ने के उद्देश्य से प्रस्तावित कृषि प्रशिक्षण केंद्र का सपना अब तक कागजों से बाहर नहीं निकल पाया है। वर्ष 2022 में बड़े उत्साह और आशाओं के साथ इस परियोजना का शिलान्यास किया गया था, लेकिन चार वर्ष बीत जाने के बावजूद आज तक इसकी इमारत का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है।
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फ्रेंड्स रिवॉर्ड्स, विस्तारFollow Usउत्तराखंड में इस साल कम बर्फबारी और बारिश ने राज्य की आर्थिकी पर गहरी चोट की है। इससे न सिर्फ पहाड़ों में पर्यटन कारोबार प्रभावित हुआ है बल्कि फसलों पर भी मार पड़ी है। यही नहीं बारिश और बर्फबारी न होने से जंगल में आग की घटनाएं भी बढ़ी हैं। स्थिति यह है कि 12,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित तुंगनाथ में आमतौर पर दिसंबर में बर्फ की चादर जम जाती थी, लेकिन इस वर्ष जनवरी के करीब मध्य तक क्षेत्र पूरी तरह बर्फ विहीन बना हुआ है। यहां पर पहली बार ऐसी स्थिति देखी जा रही है। इससे विशेषज्ञ भी पौधों के प्राकृतिक जीवन चक्र प्रभावित होने की आंशका जता रहे हैं। राहत की बात है कि जनवरी के दूसरे सप्ताह के बाद से बारिश और बर्फबारी की संभावना जताई जा रही है।







