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अमेठी सिटी। ठंडी पछुआ हवा लोगों की सेहत पर बुरा असर डाल रही है। इसका सीधा असर जिला अस्पताल की ओपीडी में देखने को मिल रहा है। दो दिनों के अवकाश के बाद सोमवार को खुले जिला अस्पताल की ओपीडी में 1086 मरीज इलाज कराने पहुंचे। इनमें से 631 बुखार के मरीज रहे।
डिपॉजिट टास्क, बांसवाड़ा के समीपवर्ती डूंगरपुर जिले के रामसागड़ा थाना क्षेत्र के गामड़ी अहाड़ा गांव की छाबड़ी बस्ती में शनिवार शाम उस समय अफरातफरी मच गई, जब झाड़ी में छिपे एक तेंदुए ने सड़क से गुजर रहे तीन लोगों पर अचानक हमला कर दिया। यह हमला खेतों के पास स्थित एक झाड़ी से हुआ, जहां तेंदुआ कुछ समय से छिपा बैठा था। हमले में तीनों व्यक्ति घायल हो गए, जिनमें से एक के जबड़े पर गंभीर चोट आई है। उसे तत्काल अस्पताल ले जाकर उपचार कराया गया।
Donald TrumpIranCivic Pollsसोना-चांदी में ऐतिहासिक उछालविक्रमादित्य सिंह की फेसबुक पर टिप्पणीT20 WCRCB vs UPकौन है अरिहा शाह?बीवी ने मरवा डाला पतिWest Bengal
विस्तारFollow Usभाटापारा में बुधवार से छत्तीसगढ़ की राजधानी में होने वाले अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैच को लेकर पूरे प्रदेश में हलचल तेज है। इसी बीच भाटापारा, जिसे मिनी बॉम्बे और सट्टे के गढ़ के नाम से जाना जाता है, एक बार फिर चर्चा में है। लंबे समय से शहर के नामचिन और रसूखदार सटोरिए भुमिगत हैं, लेकिन सूत्रों के अनुसार वे दूसरे शहरों से अब भी अपने सट्टे के कारोबार को संचालित कर रहे हैं।
भारतीय किसान यूनियन टिकैत ने क्षेत्र के गोपालीपुर गांव में किसान चौपाल का आयोजन कर सदस्यता अभियान चलाया। चौपाल में किसानों की बिजली, पानी, सिंचाई समेत थाना, तहसील और ब्लॉक स्तर पर लंबित समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान 78 किसानों ने भाकियू टिकैत की सदस्यता भी ग्रहण की।
विन, विस्तारFollow Usपैलानी थाना क्षेत्र के पचकौरी गांव में एक पिता ने अपने ही डेढ़ वर्षीय बेटे की गला दबाकर हत्या कर दी। हत्या के बाद, सबूत मिटाने के इरादे से आरोपी पिता ने मासूम के शव को यमुना नदी की बीच धारा में फेंक दिया। इस वारदात के बाद आरोपी पिता को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है। परिजनों के अनुसार, आरोपी पिता मानसिक रूप से अस्वस्थ बताया जा रहा है।
विशेष लॉग इन
आजमगढ़। जिले में हुई 21वीं पशुगणना में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। मुख्य दुधारू पशु गाय, भैंस और बकरी की संख्या में कमी दर्ज की गई है। यह गिरावट बता रही है कि लोगों का पशुपालन से मोह भंग हो रहा है। पशुओं की संख्या कम होने से दूध का उत्पादन भी जिले में कम हुआ है इसके बाद भी जिले में धड़ाधड़ मिठाई और दूध से बने उत्पादों की दुकानें खुल रही हैं। सबसे बड़ी बात तो यह है इन दुकानों पर दूध की कोई कमी नहीं होती है। आखिर यह दूध कहां से आता है यह बताने वाला कोई नहीं है। पांच साल में 2,04,490 गायें कम हो गईं। जोकि पिछली पशुगणना से लगभग आधी हैं। 1,72,649 भैंसें और 11,944 बकरियां कम हुईं हैं।
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