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💢लॉग इन डिपॉजिट💢बालोद जिले को देश के पहले नेशनल रोवर रेंजर जंबूरी के आयोजन की कमान मिली है, जो कि नौ जनवरी से शुरू होगा। इसके लिए तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। बच्चे इस जंबूरी में पहुंचकर काफी खुश हैं। बच्चों ने बताया कि उन्हें ये उनका दूसरा घर जैसा लग रहा है और समय पर खाना और एक अच्छी व्यवस्था मिल रही है। यहां पर सुवा और डंडा नृत्य के लिए विशेष प्रशिक्षण नौ हजार बच्चों द्वारा किया जा रहा है, जिसके प्रस्तुति वे आयोजन के दौरान देंगे।
️साप्ताहिक ईज़ी,सार2025 प्लेसमेंट सीजन में, LPU के इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग के अंतिम वर्ष के छात्र श्री विष्णु को देश की एक प्रमुख रोबोटिक्स और ऑटोमेशन कंपनी से ₹2.5 करोड़ प्रति वर्ष का डोमेस्टिक पैकेज मिला है। यह इस साल भारत में किसी इंजीनियरिंग ग्रेजुएट को मिला सबसे ऊँचा पैकेजों में से एक है।
सारपुलिस थाने के सामने माताजी के मंदिर में चोरी की वारदात के बाद स्थानीय विधायक ने फोन पर एएसपी को फटकार लगाते हुए धरना देने की चेतावनी दी।
अतिरिक्त कमाई, MaharashtraDonald Trumpविक्रमादित्य सिंह की फेसबुक पर टिप्पणीसोना-चांदी में ऐतिहासिक उछालRCB vs UPIranकौन है अरिहा शाह?बीवी ने मरवा डाला पतिCivic Pollsयूपी
आगरा। फतेहाबाद विद्युत वितरण मंडल में हुए 30 करोड़ रुपये से ज्यादा के टेंडर घोटाले को विभाग के बाबू नीरज पाठक ने ठेकेदारों के साथ गठजोड़ कर अंजाम दिया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि 50 टेंडरों के लिए आवेदन करते समय एक ही कंप्यूटर या लैपटॉप का इस्तेमाल किया गया। इस बात का खुलासा आवेदन करने में इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के समान आईपी एड्रेस से हुआ है।
अंबाला में कोहरे और कडाके की ठंड में अपना बचाव करते हुए राजमार्ग से गुजरता बाइक सवार। संवाद- फोटो : credit
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विद्युतनगर (अंबेडकरनगर)। विद्युत वितरण खंड टांडा के अंतर्गत आने वाले आदर्श जनता फीडर की बिजली आपूर्ति पिछले 24 घंटे से अधिक समय तक बाधित रहने के कारण क्षेत्र की लगभग चार हजार की आबादी को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। शनिवार सुबह 11 बजे से शुरू हुई यह समस्या रविवार शाम तक भी पूरी तरह हल नहीं हो सकी, जिससे घरेलू कामकाज से लेकर व्यापार तक सब कुछ ठप पड़ गया है।
बोनस, बांदा। इंदौर में दूषित पानी के सेवन से मौतों के बाद भी जिम्मेदार चेत नहीं रहे हैं। शहर में 56 हजार परिवारों को शुद्ध पीने का पानी मुहैया कराने के दावे जमीनी सच्चाई के सामने तालमेल नहीं खा रहे। केन नदी व नलकूपों से पानी स्टोर करने के लिए बनी पानी की टंकियां सालों से साफ नहीं हुई। हालांकि किसी टंकी में मई तो किसी में अप्रैल महीने में सफाई का उल्लेख किया गया है।







