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💢सर्वे💢धामपुर। एजुकेटर पद पर चयन के लिए अभ्यर्थियों में प्रमाण पत्रों को सत्यापन को लेकर असमंजस की स्थिति है। दरअसल सेवा प्रदाता फर्म ने मेसेज जारी कर संबंधित अभ्यर्थियों को बरेली बुलाया गया है। वहीं कुछ के पास मेसेज नहीं आए हैं, जिसकी शिकायत बीएसए से की गई है।
️गेट मोबाइल,न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपालPublished by:तरुणेंद्र चतुर्वेदीUpdated Sun, 11 Jan 2026 07:46 PM IST
कलेक्ट ईज़ी,
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विस्तारFollow Usराजस्थान के सीकर जिले के नेहरा की ढाणी गांव के रहने वाले स्व. सुरेंद्र का शव मृत्यु के 56 दिन बाद शुक्रवार सुबह दुबई से जयपुर पहुंचेगा। 33 वर्षीय सुरेंद्र 27 जुलाई को रोजगार के लिए जयपुर से दुबई गए थे। लेकिन 2 अगस्त को उनकी अबूधाबी (यूएई) में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई। मृत्यु के बाद भी उनका शव भारत नहीं भेजा गया और दुबई में ही रोक लिया गया। छोटे भाई सुरजीत सिंह के दुबई जाकर डीएनए सैंपल देने के बावजूद यूएई पुलिस और भारतीय दूतावास की ओर से 19 सितंबर को कहा गया कि शव को भारत भेजने में अभी एक महीना या उससे भी अधिक समय लग सकता है।
सुपर ईज़ी, बीकानेर में भारतीय परिवहन मजदूर संघ के 26वें त्रैवार्षिक अखिल भारतीय अधिवेशन का शुभारंभ शनिवार को गंगाशहर स्थित आदर्श विद्या मंदिर में हुआ। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने दीप प्रज्वलित कर उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने मजदूरों की भूमिका, आर्थिक प्रगति तथा स्वदेशी के महत्व पर अपने विचार रखे।
ट्रांसफर मोबाइल चंडीगढ़। सेक्टर-26 सब्जी मंडी से जुड़े फल-सब्जी वेंडरों की लंबे समय से चली आ रही समस्या को लेकर अब समाधान की दिशा में प्रक्रिया तेज होती दिख रही है। नगर निगम के जॉइंट कमिश्नर हिमांशु गुप्ता ने पिछले दिनों सेक्टर-26 सब्जी मंडी का दौरा किया। इस दौरान मंडी के पीछे नगर निगम अपनी खाली पड़ी जमीन को वेंडरों को स्थान देने पर विचार कर रहा है। इसको लेकर सहमति बनती नजर आई।
झील में जलस्तर बढ़ने से हुआ नुकसान, जल्द मरम्मत के निर्देश
डिपॉजिट ऑफर, भिवानी। शहर का दायरा और आबादी बढ़ने के साथ ही जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के सीवरेज ट्रिटमेंट प्लांटों पर दूषित पानी की निकासी का दबाव बढ़ गया है। इतना ही नहीं औद्योगिक सेक्टर 21 और 26 के लिए 18 करोड़ रुपये से बने कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट भी पर्यावरण एनओसी नहीं मिलने के कारण करीब दो साल से खामोश पड़ा है। बिना ट्रिटमेंट के दूषित पानी भिवानी-घग्गर ड्रेन में छोड़ा जा रहा है जिससे किसान सिंचाई से भी तौबा कर रहे हैं।







