फ्रेंड्स
वीडियो
साप्ताहिक पॉइंट्स, Inc
डाउनलोड
💢विशेष फ्री💢Magh Mela : 11 वर्ष बाद मकर संक्रांति पर षटतिला एकादशी का महासंयोग, 14 जनवरी को स्नान का पुण्यकाल
️ऐप,वाराणसी ब्यूरोUpdated Sun, 11 Jan 2026 10:42 PM IST
Donald TrumpBharat RatnaUPIran UnrestIND vs NZNew ZealandJ&Kराज ने बताया क्यों उद्धव के साथ आए?दिल्ली-NCR में पड़ रही हाड़ कांपने वाली ठंडSchool Closed
सर्वे, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय परिसर में शिक्षक राव दानिश हत्याकांड में शामिल हिस्ट्रीशीटर शूटर भाइयों जुबैर, यासिर व फहद की तलाश में जिला पुलिस के साथ-साथ अब एसटीएफ भी लग गई है। कुछ ऐसे पुराने पुलिसकर्मियों से भी इनपुट जुटाया जा रहा है, जो पूर्व में अलीगढ़ में रहे हैं।
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ाUpdated Sun, 11 Jan 2026 10:51 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अनूपपुरPublished by:अनूपपुर ब्यूरोUpdated Sat, 04 Oct 2025 01:26 PM IST
साप्ताहिक रिवॉर्ड्स, न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बारांPublished by:तरुणेंद्र चतुर्वेदीUpdated Fri, 14 Nov 2025 01:35 PM IST
मोबाइल डिस्काउंट MaharashtraDonald Trumpविक्रमादित्य सिंह की फेसबुक पर टिप्पणीसोना-चांदी में ऐतिहासिक उछालRCB vs UPIranकौन है अरिहा शाह?बीवी ने मरवा डाला पतिCivic Pollsयूपी
बलिया। आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों को एसआईआर के बाद जिले के सातों विधानसभा क्षेत्र में नए सिरे से चुनावी गणित बैठानी होगी। बांसडीह विधानसभा क्षेत्र में जीत के अंतर से 4 गुना तक वोट हैं। एसआईआर ने जिले के सात विधान सभा क्षेत्र में मतदाता सूची से कटे नाम से अब चुनावी समीकरण बदला होगा। इसके लिए राजनैतिक दलों को नए समीकरण के साथ मैदान में कसरत करनी पड़ेगी। 2022 विधान सभा चुनाव के नतीजों पर गौर किया जाय तो प्रत्याशियों के जीत के अंतर से 12 गुना तक नाम एसआईआर में कटे हैं। जिसके कारण आने वाले विधान सभा चुनाव में एक अलग तरह की चुनौती हर दल के प्रत्याशियों की होगी। जिले में बांसडीह विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में सबसे अधिक 82619 नाम कटे हैं।
कम्पलीट, विस्तारFollow Usबारां के केलवाड़ा कस्बे की निकटवर्ती ग्राम पंचायत दांता में विधायक कोष से बने हाट बाजार में धांधली और प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। स्थानीय ग्रामीणों ने सरकार द्वारा बनाए गए चबूतरों को पूरी तरह नकार दिया है। 10 लाख रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत होने के बावजूद भी मौके पर कोई नया ठोस निर्माण नहीं हुआ। महज पूर्व में बने चबूतरों की मरम्मत कर खानापूर्ति कर दी गई।







