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💢साप्ताहिक पॉइंट्स💢मध्यप्रदेश सरकार द्वारा किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से वर्ष 2026 को “कृषक कल्याण वर्ष” के रूप में मनाया जा रहा है। इसी कड़ी में रविवार को जम्बूरी मैदान, भोपाल में आयोजित शुभारंभ कार्यक्रम के दौरान पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने एक विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया। इसमें गिर, साहीवाल और थारपारकर के साथ आंध्र प्रदेश की प्रसिद्ध पुंगनूर गाय लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गायों को अपने हाथ से रोटी खिलाई। राज्यमंत्री पशुपालन एवं डेयरी लखन पटेल के मार्गदर्शन में लगाई गई इस प्रदर्शनी में देश की प्रमुख दुधारू नस्लों को प्रदर्शित किया गया। कार्यक्रम में मौजूद किसानों और पशुपालकों को विभागीय अधिकारियों ने दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए संतुलित पशु आहार, बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन और उन्नत नस्ल विकास की जानकारी दी।
️नया ईज़ी,सारछत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मुख्य सूचना आयुक्त और आयुक्तों की नियुक्ति के अनुभव मापदंडों को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया है। जस्टिस एनके व्यास ने पाया कोई अवैधता नहीं है।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपालPublished by:आनंद पवारUpdated Sun, 11 Jan 2026 06:34 PM IST
वॉच, मकर संक्रांति के पावन पर्व पर आपसी मिठास घोलने के लिए कांग्रेस के प्रदेश मुख्यालय, सदाकत आश्रम में 'दही-चूड़ा भोज' का आयोजन किया गया था। प्रदेश अध्यक्ष के इस न्योते पर कांग्रेस के ही 6 विधायकों की अनुपस्थिति ने पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक न होने के संकेत दे दिए हैं।
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अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुरPublished by:विजय पुंडीरUpdated Thu, 04 Dec 2025 05:51 PM IST
बड़ा डिपॉजिट,
मोबाइल लाइक वाराणसी ब्यूरोUpdated Sun, 11 Jan 2026 12:23 AM IST
सोना-चांदी में ऐतिहासिक उछालT20 WCWest Bengalबीवी ने मरवा डाला पतिकौन है अरिहा शाह?यूपी में एसआईआरयूपीBihar Newsप्रत्यक्ष कर संग्रह में 9% का उछालविकसित भारत युवा नेतृत्व संवाद
क्लिक रिवॉर्ड्स, जाति है कि जाती नहीं... बिहार के लिए हमेशा यह कहा जाता रहा है। चुनावों में तो खासकर। लेकिन, बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में नीतीश कुमार सरकार की वापसी के लिए मतदाताओं ने इन कहावतों को किनारे कर एकतरफा मतदान किया। परिणाम सामने है। यादव और मुस्लिम के नाम का समीकरण रखने वाली पार्टी बुरी तरह पराजित हुई। इसके साथ ही एक बात चर्चा में आ गई कि अरसे बाद बिहार विधानसभा एक खास जाति के दबदबे से बाहर निकल रहा है। इस बार विधायकों का जातीय समीकरण बहुत हद तक अलग है। दलित भी खूब हैं, सवर्ण भी मजबूत। देखिए, पूरा गणित।







