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💢सिल्वर क्लिक💢विस्तारFollow Usसेंधवा ब्लॉक के मोरदड़ और चिखली गांवों में रविवार दोपहर पागल कुत्ते ने 12 लोगों को काटकर घायल कर दिया। महिलाओं और बच्चों पर भी हमला हुआ। ग्रामीणों ने चिखली में कुत्ते को मार डाला। कई घायलों को उपचार के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया।
️स्टूडेंट,मुरादाबाद ब्यूरोUpdated Tue, 13 Jan 2026 12:21 AM IST
विस्तारFollow Usबांसवाड़ा जिले के कलिंजरा थाना क्षेत्र के शंभुपुरा गांव में कथित रूप से चर्च जाने से इनकार करने पर एक युवक की उसके भाइयों ने रिश्तेदारों के साथ पीट-पीट कर हत्या कर दी। मृतक के परिवार ने आरोप लगाया है कि रिश्तेदार धर्म परिवर्तन कराना चाहते थे। इनकार करने पर पीटने के बाद सिर पर कुल्हाड़ी से वार कर मार दिया। पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर शव पोस्टमार्टम के बाद सौंप दिया है और जांच शुरू कर दी है। हालांकि पुलिस ने जबरन चर्च ले जाने की बात से इनकार किया है।
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बालोद जिले को देश के पहले नेशनल रोवर रेंजर जंबूरी के आयोजन की कमान मिली है, जो कि नौ जनवरी से शुरू होगा। इसके लिए तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। बच्चे इस जंबूरी में पहुंचकर काफी खुश हैं। बच्चों ने बताया कि उन्हें ये उनका दूसरा घर जैसा लग रहा है और समय पर खाना और एक अच्छी व्यवस्था मिल रही है। यहां पर सुवा और डंडा नृत्य के लिए विशेष प्रशिक्षण नौ हजार बच्चों द्वारा किया जा रहा है, जिसके प्रस्तुति वे आयोजन के दौरान देंगे।
शेयर, सारMP:श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए नगर में ट्रैफिक व्यवस्था को दुरुस्त किया गया है। नेशनल हाईवे और अन्य मार्ग, जो शहर को बाहरी क्षेत्रों से जोड़ते हैं, वहां वाहनों का मार्ग परिवर्तित किया गया है ताकि बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
गोल्ड वीडियो विस्तारFollow Us'जिन्हें नसीब नहीं छत, उनकी करें बात, सर्द हवाओं में खुले आसमां तले गुजर रही रात' किसी कवि की कविता की यह पंक्तियां बांसवाड़ा जिले में उन लोगों पर सटीक बैठ रही है, जो बेघर और जरूरतमंद हैं। सर्द हवाओं में जरूरतमंद ठिठुरने को मजबूर हैं, लेकिन जिला प्रशासन और नगर परिषद ने अभी तक ऐसे परिवारों को राहत देने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है।
सारपीसीसी सचिव ने अरावली पर्वतमाला की परिभाषा में किए गए हालिया बदलाव पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे पर्यावरण संतुलन के लिए गंभीर खतरा बताया है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में 100 मीटर से कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में खनन की अनुमति दी है। ऐसे में 100 मीटर से नीचे के भूभाग को अब अरावली पहाड़ी नहीं माना जाएगा।
विशेष कलेक्ट, संवाद न्यूज एजेंसी, औरैयाUpdated Mon, 12 Jan 2026 11:29 PM IST







