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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने फरसाबहार को दी 40.89 करोड़ की विकास सौगात- फोटो : अमर उजाला
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सारपीसीसी सचिव ने अरावली पर्वतमाला की परिभाषा में किए गए हालिया बदलाव पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे पर्यावरण संतुलन के लिए गंभीर खतरा बताया है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में 100 मीटर से कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में खनन की अनुमति दी है। ऐसे में 100 मीटर से नीचे के भूभाग को अब अरावली पहाड़ी नहीं माना जाएगा।
उपचार के बाद स्वस्थ महसूस कर रही है शालिनी स्रोत विभाग
विस्तारFollow Usजिले के कोतवाली थाना क्षेत्र के जिला जेल रोड इलाके में आपसी झगड़े की समझाइश करने पहुंची बेटी और उसके तीन वर्षीय बेटे पर उसके ही पिता ने कुल्हाड़ी से हमला कर दिया। हमले में मासूम की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बेटी गंभीर रूप से घायल हो गई। पुलिस ने आरोपी पिता को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।
रिसीव, सारAjmer:मीर ने कहा कि मनरेगा देश के करोड़ों गरीब और मेहनतकश लोगों के लिए रोजगार और कानूनी मजदूरी अधिकार की गारंटी था। नई योजना उस अधिकार-आधारित ढांचे को कमजोर करती है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गहरी चोट पहुंचेगी।
अतिरिक्त शेयर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अनूपपुरPublished by:अनूपपुर ब्यूरोUpdated Tue, 11 Nov 2025 06:08 PM IST
विस्तारFollow Usप्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव आजाद सिंह राठौड़ ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा पर्वतों की परिभाषा में हाल ही में किए गए बदलाव पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय सदियों पुरानी अरावली पहाड़ियों के अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। राठौड़ के अनुसार अरावली केवल पहाड़ों की शृंखला नहीं, बल्कि उत्तर-पश्चिमी भारत की जीवनरेखा है और इसके संरक्षण से किसी भी प्रकार का समझौता आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा।
साप्ताहिक साइन अप, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी- फोटो : amar ujala







