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💢मासिक डिपॉजिट💢संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगरUpdated Sun, 11 Jan 2026 10:43 PM IST
️पुराना स्टूडेंट,सारछत्तीसगढ़ में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैच से पहले भाटापारा में सट्टा गतिविधियों की हलचल बढ़ गई है। नामचिन सटोरिए भुमिगत होकर बाहर से नेटवर्क चला रहे हैं। पुलिस लगातार कार्रवाई का दावा कर रही है।
बलरामपुर के झारखंडी रेलवे क्रासिंग पर लगी जाम में फंसे लोग ।-संवाद
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नवाबगंज। शराब के नशे में चालक ने डंपर से मकान को क्षतिग्रस्त कर दिया।
भारत-पाकिस्तान संघर्ष पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप।- फोटो : अमर उजाला
ग्राम पंचायत दादों के मजरा नगला खंजी स्थित एक ईंट भट्ठे पर खेल रहा तीन वर्षीय मासूम की ट्रैक्टर की चपेट में आने से मौत हो गई। बिहार के गया जनपद निवासी राजू कुमार अपने परिवार सहित नगला खंजी स्थित ईंट भट्ठे पर ईंट पथाई का काम करते हैं। रविवार की शाम करीब चार बजे उनका तीन वर्षीय बेटा वीरू कुमार ईंट भट्ठे के पास खेल रहा था तभी ईंटों की ढुलाई करने वाले ट्रैक्टर की चपेट में आ गया। मौके पर ही उसकी मौत हो गई। थाना पुलिस के अनुसार शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। तहरीर मिलने पर रिपोर्ट दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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इनवाइट Civic Pollsसोना-चांदी में ऐतिहासिक उछालT20 WCबीवी ने मरवा डाला पतिRCB vs UPकौन है अरिहा शाह?यूपी में एसआईआरWest BengalयूपीBihar News
अमरोहा। न्यायिककर्मी राशिद हुसैन की बेरहमी से हत्या ने पूरे परिवार को तोड़ दिया है। 35 वर्षीय पत्नी रुखसार के रुख पर सिर्फ आंसू हैं। रुक-रुक कर आती चीखों के अलावा उनके मुंह से कोई अल्फाज नहीं निकल रहे। लगातार बहती आंखों से वह पास मौजूद महिलाओं की तरफ सवालिया निगाहों से देखती हैं और रुंधे गले से एक ही सवाल निकलता है-इतनी मामूली बात पर कोई किसी की जान कैसे ले सकता है।
कलेक्ट, 73 वर्ष बाद सरगुजा में पहली महिला जनजातीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का 20 नवंबर को आगमन होगा। द्रौपदी मुर्मू पहली महिला राष्ट्रपति है जो सरगुजा जिला के अंबिकापुर आएंगी। इसके पूर्व 1952 में प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद पंडों जनजाति की दशा का प्रत्यक्ष अध्ययन करने पहुंचे थे सरगुजा के पंडों नगर पहुंचे थे। उनकी इस यात्रा की स्मृति में आज भी सरगुजा में देश का एकमात्र ग्रामीण राष्ट्रपति भवन स्मारक मौजूद है।73 वर्ष बाद, सरगुजा एक बार फिर वही गौरवशाली क्षण जीने जा रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अंबिकापुर आगमन को लेकर उमंग और गर्व का वातावरण निर्मित है।जनजातीय समुदाय इस अवसर को अपने इतिहास और सम्मान से जुड़े नए अध्याय के रूप में देख रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि 1952 ने सरगुजा को राष्ट्रीय पहचान दी थी, और 2025 यह गौरव पुनः स्थापित करेगा।







