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️अतिरिक्त अर्न,बाढड़ा। गांव हड़ौदी में सड़क हादसे की 24वीं बरसी पर बलिदानी स्मारक पर सोमवार को श्रद्धांजलि सभा का आयोजन कर शहीद किसानों को श्रद्धासुमन अर्पित किया गया। श्रद्धासुमन अर्पित करने वाले किसान संगठनों ने किसान को कर्जमुक्त करने, हादसे के पीड़ित परिवारों को तुरंत पांच-पांच लाख की आर्थिक मदद व रोजगार मुहैया करवाने, वर्ष 2023 के बकाया मुआवजा जारी करने, किसान नेता रवि आजाद प्रकरण की निष्पक्ष जांच करवाने, गांव के ग्रामीणों की लंबित बिजली समस्याओं व किसानों की अनदेखी पर सरकार से जल्द ही सुध लेने की अपील की। गांव हड़ौदी स्मारक परिसर में भाकियू अध्यक्ष हरपाल सिंह भांडवा की अध्यक्षता में आयोजित श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए किसान नेता राजकुमार हड़ौदी ने कहा कि यह क्षेत्र किसान व नौजवान की जन्मभूमि कर्मभूमि है और जब -जब प्रदेश में किसान का शोषण हुआ है तो यहां पर क्रांति का बिगुल बजा है।
इनवाइट, पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में देशभर के दलित और आदिवासी संगठनों ने सोमवार को राजधानी भोपाल में भोपाल डिक्लेरेशन-2 के ड्राफ्टिंग सत्र की शुरुआत की। यह पहल भोपाल डिक्लेरेशन-1 की 25वीं वर्षगांठ से पहले की गई और इसका उद्देश्य SC-ST वर्ग के अधिकारों, रोजगार, भूमि, शिक्षा और सामाजिक न्याय से जुड़े एजेंडे को नए संदर्भ में तैयार करना है। दिग्विजय सिंह ने प्रेस वार्ता में पुराने अनुभवों, सामाजिक बदलावों और प्रशासनिक विफलताओं पर खुलकर बात रखी।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बुरहानपुरPublished by:बुरहानपुर ब्यूरोUpdated Fri, 22 Aug 2025 05:01 PM IST
चहनिया। भुपौली पंप कैनाल से नहर में पानी छोड़े जाने से किसानों की फसल को नुकसान पहुंचा है। किसानों ने बताया कि नवंबर में भारी बारिश के चलते अभी खेतों में पर्याप्त नमी है। इस कारण गेहूं की बुआई दिसंबर के अंतिम सप्ताह व जनवरी के प्रथम सप्ताह में की गई। ऐसे में नहर में पानी छोड़े जाने के कारण किसानों का भारी नुकसान हो रहा है। लगभग 2 प्रतिशत किसान अपनी फसलों को भरने के लिए टेल पर पानी ले जाना चाहते हैं और कुलावे को खुला छोड़ दे रहे हैं। जिससे अन्य किसानों की फसलें डूब जा रही हैं, जिससे आए विवाद हो रहा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बाUpdated Sun, 11 Jan 2026 10:09 PM IST
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नया सब्सक्राइब अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुरPublished by:अनुज कुमारUpdated Mon, 05 Jan 2026 01:42 PM IST
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोलीUpdated Mon, 12 Jan 2026 04:30 PM IST
कम्पलीट, राजस्थान की लोक परंपराएं अपने संवेदनात्मक जुड़ाव और पारिवारिक स्नेह के लिए जानी जाती हैं। इन्हीं परंपराओं में से एक है ‘मायरा’, जिसमें भाई अपनी बहन के बच्चों की शादी में प्रेम, आदर और समर्पण के भाव से उपहार, वस्त्र और धन लेकर पहुंचते हैं। इस परंपरा की झलक बीकानेर जिले के नोखा क्षेत्र के सीनियाला गांव में देखने को मिली, जहां भाइयों ने मायरे में ऐसा योगदान दिया कि यह पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया।







