वीआईपी टास्क
टास्क पैसे
वीआईपी स्टूडेंट, Inc
रिसीव
💢डाउनलोड💢
️वॉच इनाम,विस्तारFollow Usनक्सल प्रभावित क्षेत्रों में साहस, समर्पण और उत्कृष्ट पुलिसिंग का परिचय देने वाले मध्यप्रदेश पुलिस के 61 अधिकारियों और कर्मचारियों को बड़ी सौगात मिली है। पुलिस मुख्यालय, मध्यप्रदेश भोपाल ने बालाघाट जिले में नक्सल विरोधी अभियानों में उल्लेखनीय भूमिका निभाने वाले जवानों को क्रम से पूर्व पदोन्नति देने के आदेश जारी किए हैं। इसमें उप निरीक्षक, सहायक उपनिरीक्षक, प्रधान आरक्षक और आरक्षक स्तर के अधिकारी-कर्मचारी शामिल हैं। पुलिस मुख्यालय से जारी आदेश के अनुसार, 14 जून 2025 को बालाघाट जिले के थाना रूपझर क्षेत्र अंतर्गत पचमादर-कटंगीया पहाड़ी जंगल क्षेत्र में पुलिस बल द्वारा अपनी जान की परवाह किए बिना वांछित और सक्रिय नक्सलियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की गई थी। इस अभियान में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) से जुड़े हार्डकोर नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई कर सुरक्षा बलों ने बड़ी सफलता हासिल की थी।
रिवॉर्ड्स क्लिक, चण्डीगढ़-हरियाणा ब्यूरोUpdated Mon, 12 Jan 2026 01:53 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पूर्णियाPublished by:पूर्णिया ब्यूरोUpdated Mon, 12 Jan 2026 08:17 PM IST
वीआईपी सब्सक्राइब,
इनाम लॉग इन संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना (पंजाब)Published by:अंकेश ठाकुरUpdated Mon, 12 Jan 2026 02:52 PM IST
गोपीगंज कोतवाली के पर्वतपुर निवासी संविदा विद्युत कर्मचारी अमन यादव जालसाजी के शिकार हो गए। साइबर ठगों ने मोबाइल हैक कर उनके सहयोगी एवं मित्रों से अपने खाते में 30 हजार मंगा लिए। मामले की जानकारी होने पर पीड़ित ने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई। साइबर पुलिस ने नंबर को बंद कर दिया है। प्रभारी निरीक्षक शैलेश राय ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। संवाद
शेयर कम्पलीट, विस्तारFollow Usअब सरकारी अधिकारी व कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों पर जांच एजेंसी सीधे कार्रवाई नहीं कर सकेगी। पहले उच्च अधिकारी से स्वीकृति जरूरी होगी। मगर रंगे हाथ पैसे लेने वाले वाले मामलों में पहले की तरह कार्रवाई जारी रहेगी। हरियाणा सरकार ने अधिकारियों व कर्मचारियों से संबंधित भ्रष्टाचार के मामलों में जांच के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू की है। इसके तहत भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने पर अब सरकारी अधिकारी व कर्मचारी के खिलाफ जांच या पूछताछ से पहले सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी लेना अनिवार्य कर दिया गया है। हालांकि यह फैसला उन मामलों में लागू नहीं होगा, जहां अधिकारी व कर्मचारी रंगे हाथ पकड़े जाएंगे।







