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️विज़िट लाइक,राजस्थान के उत्तर-पश्चिमी जिलों में घने कोहरे का असर देखने को मिला, जिससे बाड़मेर, जोधपुर, बीकानेर, चूरू, नागौर सहित कई इलाकों में दिन का तापमान 5 से 7 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया। उत्तरी हवाओं के चलते न्यूनतम तापमान में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई। मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के अनुसार, आज भी राज्य के उत्तर-पश्चिमी जिलों में हल्के से मध्यम और कहीं-कहीं घना कोहरा छाए रहने की संभावना है। साथ ही आने वाले दिनों में उत्तरी हवाओं के प्रभाव से तापमान में और गिरावट आने की उम्मीद है, जिससे सर्दी का असर बढ़ेगा। पिछले 24 घंटों के दौरान जैसलमेर, बीकानेर, जोधपुर, गंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू और झुंझुनूं के क्षेत्रों में घना कोहरा दर्ज किया गया। हालांकि, कोहरे और कमजोर हवाओं के कारण राज्य के अधिकांश शहरों में न्यूनतम तापमान सामान्य से ऊपर बना हुआ है, जिससे सुबह और शाम की ठंड अपेक्षाकृत कम महसूस हो रही है।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भिंडPublished by:प्रिया वर्माUpdated Sat, 06 Dec 2025 09:09 PM IST
पैसे अर्न, सलूणी (चंबा)। ग्राम पंचायत किहार स्थित मंगला माता मंदिर प्रांगण में हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन के दौरान राम आएंगे भजन पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर नृत्य करने लगे और मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठा। कार्यक्रम में धर्म, संस्कृति और सामाजिक सरोकारों पर सार्थक चर्चा की गई।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भागलपुरPublished by:शबाहत हुसैनUpdated Mon, 24 Nov 2025 01:21 PM IST
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बाUpdated Sun, 11 Jan 2026 07:03 AM IST
कलेक्ट, छत्तीसगढ़ में मौसम का रुख बदलता नजर आ रहा है। पश्चिमी विक्षोभ और समुद्र से आ रही नमी के असर से आने वाले दिनों में भीषण ठंड की तीव्रता कम होने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, रात के तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है, जिसका प्रभाव खासकर उत्तरी छत्तीसगढ़ में ज्यादा देखने को मिलेगा।
सिल्वर विथड्रॉ मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में स्थित मां ताप्ती का उद्गम स्थल मुलताई धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। अब इसी ऐतिहासिक पहचान को और अधिक प्रामाणिक रूप देने के उद्देश्य से मुलताई का नाम बदलकर ‘मूलतापी’ किए जाने की घोषणा की गई है। यह नाम परिवर्तन मां ताप्ती की प्राचीन विरासत और क्षेत्र की ऐतिहासिक जड़ों से जुड़ा हुआ माना जा रहा है।
चुराह (चंबा)। उपमंडल चुराह में किसानों को आधुनिक कृषि से जोड़ने के उद्देश्य से प्रस्तावित कृषि प्रशिक्षण केंद्र का सपना अब तक कागजों से बाहर नहीं निकल पाया है। वर्ष 2022 में बड़े उत्साह और आशाओं के साथ इस परियोजना का शिलान्यास किया गया था, लेकिन चार वर्ष बीत जाने के बावजूद आज तक इसकी इमारत का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है।
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