दैनिक इंस्टेंट
ऐप
फ्रेंड्स इंस्टेंट, Inc
साप्ताहिक कैश
💢इंस्टेंट💢
️स्टूडेंट कूपन,Donald TrumpIranCivic Pollsसोना-चांदी में ऐतिहासिक उछालविक्रमादित्य सिंह की फेसबुक पर टिप्पणीT20 WCRCB vs UPकौन है अरिहा शाह?बीवी ने मरवा डाला पतिWest Bengal
सारहोटल संचालक प्रभु डोडियार सहित पांच महिलाओं को पकड़ा गया। संचालक ने हर ग्राहक से 1000 रुपये लेकर उसमें से 500 रुपये महिला को और 500 रुपये कमरे के लिए लेने की बात कबूल की। पुलिस अब सभी से पूछताछ कर रही है।
पॉइंट्स कलेक्ट, आक्रोशित लोगों को समझाती एसडीएम याक्षी अरोड़ा।- फोटो : संवाद
विस्तारFollow Usअशोकनगर जिले के चंदेरी में 11 वर्षीय बच्चे ने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजनों द्वारा खेलने के दौरान डांटने पर बच्चे ने यह कदम उठाया। शव का पोस्टमॉर्टम किया गया और पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।
ऑनलाइन इनाम, अमर उजाला नेटवर्क, बालोदPublished by:राहुल तिवारीUpdated Fri, 02 Jan 2026 02:49 PM IST
प्रीमियम कमाई विस्तारFollow Usउप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन तथा लोक निर्माण विकास मंत्री अरुण साव के मुख्य आतिथ्य में नगर पालिका अम्बिकापुर क्षेत्र के लिए 82 करोड़ 23 लाख 71 हजार रुपये की लागत से होने वाले विभिन्न निर्माण एवं विकास कार्यों का भव्य लोकार्पण एवं भूमिपूजन कार्यक्रम संपन्न हुआ।
राजस्थान में ट्रांस्पोर्ट विभाग में चल रहे भ्रष्टाचार की कहानी आपको हैरान कर देगी। यहां परिवहन विभाग के अधिकारी गिरोह बनाकर वसूली का काम कर रहे हैं और वाहनों से अवैध वसूली के लिए दलालों के मार्फत कॉल सेंटर तक चला रहे हैं, जहां रिश्वत की राशि नकद के अलावा ऑनलाइन तक करने की सुविधा दी जा ही है। राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने गुरुवार देर शाम परिवहन विभाग में फैले संगठित भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई की। महानिदेशक गोविन्द गुप्ता के निर्देशन में एसीबी की 12 टीमों ने अजमेर संभाग के ब्यावर, नसीराबाद, विजयनगर, केकड़ी, किशनगढ़ और अजमेर कार्यालयों से जुड़े अधिकारियों, कर्मचारियों और दलालों के 11 ठिकानों पर आकस्मिक सर्च ऑपरेशन चलाया ।
विथड्रॉ सब्सक्राइब, राजस्थान प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के दावे किए जाते हैं, लेकिन बालोतरा जिले के गिड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में सामने आ रहे हालात इन दावों की सच्चाई पर सवाल खड़े कर रहे हैं। यहां नियमों को ताक पर रखकर मरीजों को सरकारी दवाइयों के बजाय निजी मेडिकल से बाहरी दवाइयां खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। आरोप है कि यह पूरा खेल कुछ चिकित्सकों और निजी मेडिकल संचालकों की आपसी मिलीभगत से संचालित हो रहा है।







