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️मासिक गेम,सारइक्विटी बाजार में अस्थिरता के बीच फ्लेक्सीकैप फंड्स एक 'ऑल-वेदर' रणनीति बनकर उभरे हैं। जानिए क्यों यह कैटेगरी निवेशकों की पहली पसंद बन रही है।

विस्तारFollow Us1 नवंबर 1983, यह वह ऐतिहासिक दिन था जब राजस्थान के दक्षिणी सिरे पर बसे जनजाति बहुल बांसवाड़ा जिले की तकदीर बदलनी शुरू हुई। इसी दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कागदी पिकअप वियर पर बटन दबाकर माही बांध की नहरों में जलप्रवाह शुरू किया, जिसने इस क्षेत्र के जीवन, भूमि और विकास की दिशा ही बदल दी। उस पल के साथ ही बांसवाड़ा का नाम ‘कालापानी’ से निकलकर ‘हराभरा जनपद’ के रूप में प्रसिद्ध हुआ।

इनवाइट कमेंट, बबेरू। अद्भुत चौराहा के सुंदरीकरण और सड़क चौड़ीकरण के लिए प्रशासन द्वारा लगभग दो सौ व्यापारियों को अतिक्रमण हटाने का सात दिनों का नोटिस दिए जाने के बाद स्थानीय व्यापारियों में तीव्र रोष व्याप्त है। व्यापारियों का आरोप है कि सुंदरीकरण के नाम पर उनका आजीविका का साधन उजाड़ा जा रहा है। इस मुद्दे पर शनिवार को राष्ट्रीय जन उद्योग व्यापार संगठन के नगर अध्यक्ष केके महंत के नेतृत्व में व्यापारियों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए अनिश्चितकालीन व्यापार बंद करने की घोषणा की।

विस्तारFollow Usबालोद जिले के उद्यान रोपणी में आयोजित बैठक के दौरान वन समिति के सभापति ने अधिकारियों पर पेड़ों की कटाई को शह देने का आरोप लगाया। इस पर रेंजर ने कहा कि यदि उनकी रेंज में इस तरह की कोई गतिविधि होती है तो जानकारी देने पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राजस्व मामलों में एसडीएम और तहसीलदार की जिम्मेदारी होती है।

अमर उजाला नेटवर्क बेमेतराPublished by:अनुज कुमारUpdated Mon, 05 Jan 2026 07:28 PM IST

गोरखपुर ब्यूरोUpdated Tue, 13 Jan 2026 12:42 AM IST

ऐप शेयर, अंबाला। प्राचीन बब्याल गद्दी, श्री गोगा मंदिर दलीप गढ़ में मकर संक्रांति का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। मंदिर में गुरु गोरखनाथ जी को समर्पित खिचड़ी वितरण की 52 साल पुरानी परंपरा को निभाते हुए विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। योगी दिनेश नाथ ने बताया कि इस बार सूर्य का मकर राशि में प्रवेश और एकादशी तिथि के संयोग के कारण यह पर्व 15 जनवरी, गुरुवार को मनाया जाएगा। इस परंपरा का इतिहास दिलचस्प है। मंदिर के योगी दिनेश नाथ ने बताया कि वर्ष 1973 में स्वर्गीय योगी शमशेरनाथ ने एक छोटी सी कड़ाही में खिचड़ी बनाकर बांटने की शुरुआत की थी, देखते ही देखते यह परंपरा विशाल रूप ले चुकी है। अब हर साल मकर संक्रांति पर लगभग ढाई क्विंटल देसी घी की खिचड़ी तैयार कर सुबह से शाम तक श्रद्धालुओं में वितरित की जाती है।

पॉइंट्स वेरिफाई

संवाद न्यूज एजेंसी, औरैयाUpdated Sun, 11 Jan 2026 11:32 PM IST

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