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💢इंस्टेंट विज़िट💢अस्पताल में मलेरिया मरीज की मौत हो गई।- फोटो : अमर उजाला
️पैसे कमेंट,कहते हैं कि इंसान चला जाता है, लेकिन उसके कर्म अमर हो जाते हैं। राजस्थान के बालोतरा जिले से आई यह खबर इसी कथन को साकार करती है। महज पांच साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कहने वाले भोमाराम ने अपने जीवन के अंतिम क्षणों में ऐसा काम कर दिया, जिसने तीन जरूरतमंद लोगों को नई जिंदगी दे दी। भोमाराम के माता-पिता ने गहरे दुख के बीच ऐसा साहसिक और मानवीय फैसला लिया, जो पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन गया है।
बांदा। इंदौर में दूषित पानी के सेवन से मौतों के बाद भी जिम्मेदार चेत नहीं रहे हैं। शहर में 56 हजार परिवारों को शुद्ध पीने का पानी मुहैया कराने के दावे जमीनी सच्चाई के सामने तालमेल नहीं खा रहे। केन नदी व नलकूपों से पानी स्टोर करने के लिए बनी पानी की टंकियां सालों से साफ नहीं हुई। हालांकि किसी टंकी में मई तो किसी में अप्रैल महीने में सफाई का उल्लेख किया गया है।
साप्ताहिक पॉइंट्स, विस्तारFollow Usदिल्ली में हुए धमाके के बाद राजस्थान पुलिस मुख्यालय की ओर से पूरे प्रदेश में सुरक्षा अलर्ट जारी किया गया है। सभी जिलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, मॉल, धार्मिक स्थलों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में विशेष सतर्कता बरतें। पुलिस को लावारिस वस्तुओं और संदिग्ध वाहनों की सघन जांच करने के आदेश दिए गए हैं।
वाराणसी ब्यूरोUpdated Thu, 08 Jan 2026 01:03 AM IST
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वरUpdated Tue, 13 Jan 2026 12:35 AM IST
अमृतसर के कोर्ट रोड स्थित होटल किंग्स रूट में एक एनआरआई महिला की हत्या हुई है। महिला का शव होटल के कमरे में मिला है। मृतका की पहचान प्रभजोत कौर निवासी गांव वड़ैच जिला गुरदासपुर के रूप में हुई है। महिला अपने पति के साथ होटल में रुकी हुई थी, लेकिन पति होटल से फरार हो चुका है। शक जताया जा रहा है कि पति ने ही महिला की हत्या की और फरार हो गया।
विज़िट रिसीव, अमेठी सिटी। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के क्रियान्वयन में नामित विवादित फर्म ने प्रभारी जिला समाज कल्याण अधिकारी व परियोजना निदेशक (पीडी) ऐश्वर्य यादव पर कमीशन मांगने का गंभीर आरोप लगाया है। इस मामले में गठित जांच टीम सोमवार को परियोजना निदेशक का बयान दर्ज कर सकती है। हालांकि फर्म संचालक मंडल स्तर से जांच कराए जाने की कवायद में जुटे हैं।
लॉग इन विज़िट गडवार/चिलकहर। सरकार जहां एक ओर डिजिटल इंडिया और सुशासन का दावा करते है लेकिर ज़मीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। हालत यह है कि जन्म प्रमाणपत्र जैसे बुनियादी दस्तावेज़ को बनवाना में लोगों का एक से दो हजार रुपये खर्च करना पड़ रहा है। वहीं, तहसील व ब्लाक चक्कर काटना अलग से हो जा रहा है। लोगों का आरोप है कि जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए उनसे 1000 से लेकर 2000 रुपये तक की अवैध वसूली की जा रही है। कभी सर्वर डाउन, कभी बाबू साहब छुट्टी पर तो कभी दस्तावेज़ अधूरे बताकर वापस कर दिया जाता है। पीड़िता राजकुमारी देवी, ब्रजेश पांडेय, संतोष सिंह, पंकज गुप्ता आदि का कहना है कि दो महीने से दौड़ रहे हैं। हर बार कोई नई कमी निकाल देते हैं। आखिर में साफ़ बोल दिया गया कि 1500 रुपये दे दो, तभी बनेगा।
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