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💢छोटा कूपन💢घूसकांड में एसीबी ने एएसआई को किया गिरफ्तार- फोटो : अमर उजाला
️कूपन,विस्तारFollow Usबूंदी के करवर थाना क्षेत्र में हाल ही में नीलगायों के शिकार की घटनाओं से मचे हड़कंप के बीच पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को हिरासत में लिया है। इनके कब्जे से बरामद मोबाइल फोन में नीलगायों को दौड़ाकर शिकार करते हुए का वीडियो मिला है। पुलिस ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी से वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत दर्ज प्रकरणों में अहम सुराग हाथ लगे हैं।
गांधी चौक के पास राजकीय कन्या विद्यालय के रास्ते पर किया गया अतिक्रमण। संवाद
कमाई कैश, विस्तारFollow Usछत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में एक दिन पहले यानि 15 नवंबर शनिवार से धान खरीदी शुरू हो गई है। पहले दिन कर्मचारियों के हड़ताल के कारण कई केन्द्र में धान खरीदी नहीं हो सकी है। ऐसे में अब जिला प्रशासन जिले में एस्मा लागू कर दिया है। कलेक्टर रणबीर शर्मा ने बताया कि धान खरीदी कार्य में किसी भी प्रकार का व्यवधान, देरी या लापरवाही बिल्कुल स्वीकार्य नहीं होगी। शासन ने धान खरीदी जैसे अति आवश्यक कार्य को जारी रखने के लिए आवश्यक सेवा संरक्षण कानून (एस्मा) लागू कर दिया है, जिसके तहत शासन ने सख्त चेतावनी भी जारी की है।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटनाPublished by:आदित्य आनंदUpdated Mon, 12 Jan 2026 01:27 PM IST
रोडवेज की इन बसों में अब दिखाई देंगी महिला परिचालक। संवाद- फोटो : reasi news
सारसऊदी अरब में 13 नवंबर 2025 को रमेश की मौत हो गई थी। इसके बाद उसका शव अभी तक भारत नहीं पहुंचा है। इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। अब भारतीय दूतावास ने बताया है कि सऊदी पुलिस की फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद शव भारत पहुंचेगा।
कमेंट, सारमनेन्द्रगढ़-भरतपुर-चिरमिरी जिले के विकासखंड खड़गवां से आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने ‘जर्नी ऑफ सेनिटेशन हाइजिन’ (जोश) कार्यक्रम का हरी झंडी दिखाकर औपचारिक शुभारंभ किया।
साप्ताहिक सर्वे सारभोपाल में 11 और 12 जनवरी को मध्यप्रदेश स्टार्टअप समिट-2026 का आयोजन होगा, जिसमें देशभर के स्टार्टअप्स और निवेशक शामिल होंगे। दो दिन तक चलने वाले इस सम्मेलन में पिचिंग, सत्र, संवाद और निवेश के अवसरों पर चर्चा की जाएगी।
सिल्वर कूपन, सारसुकमा जिले के जगरगुंडा क्षेत्र से सामने आई एक तस्वीर ने एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल खोल दी है। बड़े-बड़े दावों के बावजूद, सुदूर आदिवासी इलाकों में जमीनी हकीकत चिंताजनक बनी हुई है।







