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💢अल्ट्रा कूपन💢अमर उजाला नेटवर्क, छत्तीसगढ़Published by:अनुज कुमारUpdated Wed, 31 Dec 2025 05:55 PM IST
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गोरखपुर ब्यूरोUpdated Tue, 13 Jan 2026 01:02 AM IST
कम्पलीट, न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेरPublished by:अजमेर ब्यूरोUpdated Sat, 10 Jan 2026 10:44 AM IST
विस्तारFollow Usबारां जिले के किशनगंज के पास हाईवे पर मंगलवार रात एक भीषण सड़क हादसा हो गया। खटका गांव के किसान दीपक मेहता अपनी मक्का की फसल लेकर ट्रैक्टर-ट्रॉली से बारां मंडी जा रहे थे। इसी दौरान एक तेज रफ्तार ट्रॉले ने पीछे से जोरदार टक्कर मार दी, जिससे ट्रैक्टर-ट्रॉली अनियंत्रित होकर पलट गई और दीपक की मौके पर ही मौत हो गई।
विस्तारFollow Usअमरकंटक के जंगलों में साल के पेड़ गंभीर साल बोरर कीट से ग्रसित पाए गए हैं। साल बोरर कीट एक विनाशकारी कीट है, जो मुख्य रूप से साल के पेड़ों को नुकसान पहुंचाता है, उन्हें खोखला कर देता है। यह कीट साल के पेड़ों के लिए सबसे खतरनाक कीटों में से एक है और यह खड़े पेड़ और ताजी कटी हुई लकड़ी दोनों को प्रभावित करता है। बीते कई महीनों से अमरकंटक के जंगलों में साल बोरर कीड़े का प्रकोप फैला हुआ है। जिसके कारण अमरकंटक के जंगल में स्थित 10 हजार से अधिक साल के पेड़ इससे क्षतिग्रस्त हो चुके हैं।
विन ऑफर, विस्तारFollow Usमहिलाओं को लघु ऋण देकर जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए कार्य रही क्रेडिट कंपनी के कर्मचारियों ने अमानत में खयानत कर दी। कर्मचारियों ने महिलाओं से दिए गए ऋण की राशि तो वसूल ली लेकिन कंपनी में जमा नहीं कराई। इस पर एरिया मैनेजर ने शाखा प्रबंधक और तीन केंद्र प्रबंधकों के खिलाफ सज्जनगढ़ थाने में प्रकरण दर्ज कराया है।
मासिक ऑफर
फूलपुर के गोपालीपुर में किसान चौपाल कार्यक्रम के दौरान सदस्यता प्रमाण पत्र प्रदान करते भारतीय क
रजिस्टर, 73 वर्ष बाद सरगुजा में पहली महिला जनजातीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का 20 नवंबर को आगमन होगा। द्रौपदी मुर्मू पहली महिला राष्ट्रपति है जो सरगुजा जिला के अंबिकापुर आएंगी। इसके पूर्व 1952 में प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद पंडों जनजाति की दशा का प्रत्यक्ष अध्ययन करने पहुंचे थे सरगुजा के पंडों नगर पहुंचे थे। उनकी इस यात्रा की स्मृति में आज भी सरगुजा में देश का एकमात्र ग्रामीण राष्ट्रपति भवन स्मारक मौजूद है।73 वर्ष बाद, सरगुजा एक बार फिर वही गौरवशाली क्षण जीने जा रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अंबिकापुर आगमन को लेकर उमंग और गर्व का वातावरण निर्मित है।जनजातीय समुदाय इस अवसर को अपने इतिहास और सम्मान से जुड़े नए अध्याय के रूप में देख रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि 1952 ने सरगुजा को राष्ट्रीय पहचान दी थी, और 2025 यह गौरव पुनः स्थापित करेगा।







