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💢ऑफर ऐप💢विस्तारFollow Usबिहार में सुशासन की नींव को और मजबूत करने और विकास कार्यों की रफ्तार नापने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर अपनी चर्चित यात्रा मोड में लौट रहे हैं। आगामी 16 जनवरी से मुख्यमंत्री समृद्धि यात्रा पर निकलेंगे। इस दौरान वे बिहार के विभिन्न जिलों का भ्रमण कर न केवल सात निश्चय योजनाओं की प्रगति देखेंगे, बल्कि जनता के बीच जाकर उनका फीडबैक भी लेंगे। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों और संबंधित विभागों को अलर्ट जारी कर दिया है।
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छोटा डिस्काउंट, साररायपुर जिले के थाना गोबरानवापारा पुलिस ने दुलना तिराहा के पास कार्रवाई करते हुए प्रतिबंधित मादक पदार्थ चिट्टा (हेरोइन) के साथ दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
अमर उजाला नेटवर्क, चंदौली।Published by:प्रगति चंदUpdated Mon, 12 Jan 2026 03:41 PM IST
विस्तारFollow Usराजधानी भोपाल के अमन कॉलोनी स्थित ईरानी डेरे से देशभर के 14 राज्यों में अलग-अलग तरह के वारदात को अंजाम देने के लिए आधा दर्जन गैंगों को संचालित करने वाला कुख्यात बदमाश राजू ईरानी उर्फ रहमान को भोपाल लाने के लिए पुलिस टीम सूरत में मौजूद है। रविवार देर रात तक उसे ट्रांजिट वारंट पर पुलिस भोपाल लाने की तैयारी में है। हालांकि रविवार को उसे सूरत की विशेष अदालत में प्रस्तुत किया जाएगा, इसके बाद ही आगे का निर्णय हो सकेगा।
लुधियाना के हलवारा के गांव सुधार के गैंगस्टर नवप्रीत सिंह धालीवाल की कनाडा में हत्या हुई है। कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया स्थित एबॉट्सफोर्ड शहर में गोलियों से भून कर उसकी हत्या कर दी गई। अकाली दल बादल के सीनियर नेता और ब्लॉक समिति के पूर्व चेयरमैन मेहर सिंह धालीवाल ने बताया कि नवप्रीत सिंह धालीवाल रिश्तेदारी में उनका पोता लगता था। उसके दादा नाजर सिंह चचेरे भाई थे। नवप्रीत सिंह धालीवाल के पिता गुरजिंदर सिंह धालीवाल 1995 में सुधार से कनाडा चले गए थे और नवप्रीत सिंह धालीवाल का जन्म कनाडा में ही हुआ था।
पैसे, अमर उजाला नेटवर्क, रायपुरPublished by:अमन कोशलेUpdated Fri, 09 Jan 2026 03:59 PM IST
प्लेटिनम कमेंट विस्तारFollow Usबलरामपुर तहसील कार्यालय में दस्तावेजों के एवज में अवैध धन मांगने का एक गंभीर मामला सामने आया है। टांगरमहरी निवासी दीपक यादव ने तहसील कार्यालय के समक्ष तख्ती लेकर धरना प्रदर्शन किया। उनका आरोप है कि तहसील कार्यालय में पदस्थ एक बाबू और चौकीदार ने उन्हें अधिकार अभिलेख जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए ₹500 की रिश्वत मांगी, जबकि इसके लिए निर्धारित सरकारी शुल्क मात्र ₹10 था। दीपक यादव के पास ₹200 ही उपलब्ध थे और वह शेष ₹300 के लिए राजस्व अधिकारियों से “भीख” मांगने की बात कहते हुए धरने पर बैठे थे।
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