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💢विन गेट💢विस्तारFollow Usजाति है कि जाती नहीं... बिहार के लिए हमेशा यह कहा जाता रहा है। चुनावों में तो खासकर। लेकिन, बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में नीतीश कुमार सरकार की वापसी के लिए मतदाताओं ने इन कहावतों को किनारे कर एकतरफा मतदान किया। परिणाम सामने है। यादव और मुस्लिम के नाम का समीकरण रखने वाली पार्टी बुरी तरह पराजित हुई। इसके साथ ही एक बात चर्चा में आ गई कि अरसे बाद बिहार विधानसभा एक खास जाति के दबदबे से बाहर निकल रहा है। इस बार विधायकों का जातीय समीकरण बहुत हद तक अलग है। दलित भी खूब हैं, सवर्ण भी मजबूत। देखिए, पूरा गणित।
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चंपावत। यू-कॉस्ट की ओर से डायट लोहाघाट की विशेष पहल पर वनाग्नि जागरूकता के लिए महत्वपूर्ण शोध कार्य किया जा रहा है। शोध के तहत जागरूकता गीतों के निर्माण पर जोर दिया जा रहा है। इन गीतों के माध्यम से वनाग्नि की घटनाओं की रोकथाम हो सकेगी।
फ्री, चंडीगढ़: सेक्टर 40/41 डिवाइडिंग रोड पर शनिवार रात करीब साढ़े 7 बजे तेज रफ्तार कार ने सड़क पार कर रही 60 वर्षीय बुजुर्ग महिला को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी तेज थी कि महिला बोनट से टकराकर उछलकर गिरी और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। मृतक महिला की पहचान सेक्टर 40 सी निवासी सरबजीत कौर के रूप में हुई है।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बैतूलPublished by:दिनेश शर्माUpdated Wed, 24 Dec 2025 05:59 PM IST
T20 WCसोना-चांदी में ऐतिहासिक उछालWest Bengalविकसित भारत युवा नेतृत्व संवादकौन है अरिहा शाह?यूपी में एसआईआरयूपीBihar Newsप्रत्यक्ष कर संग्रह में 9% का उछालदिल्ली में फिर टूटा ठंड का रिकॉर्ड
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लॉग इन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बैतूलPublished by:बैतूल ब्यूरोUpdated Sun, 11 Jan 2026 12:03 PM IST
सारछत्तीसगढ़ में पहली बार आयोजित होने वाली राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी भारी विवादों में घिर गई है। भाजपा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने 5 जनवरी को हुई बैठक की अध्यक्षता कर आयोजन को तत्काल स्थगित करने का निर्णय लिया है।
इंस्टेंट सब्सक्राइब, चंबा। वन मंडल चंबा में कशमल की जड़ों के दोहन को लेकर स्थानीय लोग व ठेकेदार आमने सामने हो गए हैं। अब तक ठेकेदार लोगों को दस रुपये प्रति किलो की दर से कशमल जड़ों का दाम दे रहे थे जबकि दवा कंपनियों को ऊंचे दामों पर बेच रहे थे। इसकी भनक लगते ही स्थानीय लोग दाम बढ़ाने की मांग पर अड़ गए हैं। अब वे दस रुपये की जबह 18 रुपये प्रति किलो दाम देने की मांग कर रहे हैं। यह दाम चुकाने के लिए ठेकेदार तैयार नहीं हाे रहे हैं। इसके चलते कशमल दोहन क्षेत्र में थम गया है। हालांकि, कुछ इलाकों में लोग इसके दोहन का विरोध भी कर रहे हैं। कुछ मात्रा में उन्होंने उखाड़ी गई कशमल को जलाया भी है। फिलहाल क्षेत्र के लोग अब दाम बढ़ाने की मांग पर अड़े हैं। ऐसे में यह मामला अब लोगों व ठेकेदार के बीच में फंस गया है। विभाग चाहकर भी इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकता। विभाग के कर्मचारी सही तरीके से कशमल दोहन पर निगरानी रख सकते हैं। ये जड़ें स्थानीय लोग किस दाम पर बेच रहे हैं और ठेकेदार आगे किस दाम पर बेच रहा है, इसमें उनका कोई लेना-देना नहीं है।







