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💢सर्वे💢चरखी दादरी। दादरी जिले में भूजल का स्तर लगातार गिरता जा रहा है और इसके साथ ही पानी में फ्लोराइड व लवणीयता की मात्रा भी बढ़ चुकी है। हालात यह हैं कि जिले के बाढड़ा क्षेत्र को पहले डार्क जोन घोषित किया जा चुका है। हालांकि 2018 में किसानों की मांग और हल्के सुधार के साथ डार्क जोन से बाहर कर दिया था। पेयजल संकट इतना गहरा गया है कि अब शहर ही नहीं, गांवों में भी लोग आरओ और कैंपर से पानी खरीद कर पीने के लिए मजबूर हैं। बाढड़ा क्षेत्र में भूजल स्तर करीब 260 फीट नीचे पहुंच चुका है। लगातार दोहन और प्राकृतिक जल स्रोतों के खत्म होने से हालात और गंभीर हो गए हैं। दादरी जिले के अधिकतर क्षेत्रों में भूजल लवणीय और सोडिक पाया जा रहा है, जो सेहत के लिए बेहद नुकसानदायक है। विशेषज्ञों के अनुसार फ्लोराइड युक्त पानी लंबे समय तक पीने से हड्डियों और दांतों से जुड़ी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।
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विस्तारFollow Usभीलवाड़ा शहर के मध्य स्थित सरकारी दरवाजा क्षेत्र में शनिवार शाम उस समय अफरातफरी मच गई जब कांग्रेस नेता और हलेड़ ग्राम पंचायत के पूर्व सरपंच हरफूल जाट पर बाइक सवार हथियारबंद बदमाशों ने फायरिंग और तलवार से हमला कर दिया। घटना शाम करीब सात बजे की है, जब हरफूल जाट किसी कार्य से बाजार पहुंचे थे। हमलावरों ने पहले गोली चलाई और फिर तलवार से वार कर मौके से फरार हो गए।
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरीUpdated Mon, 12 Jan 2026 02:00 AM IST
विस्तारFollow Usबस स्टैंड छतरपुर के पास स्थित मस्जिद की सुरक्षा में तैनात पुलिस बल के टेंट में आग लगाकर शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में बुधवार को प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश आशीष श्रीवास्तव, जिला छतरपुर के न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार देते हुए पांच वर्ष के सश्रम कारावास एवं अर्थदंड की सजा सुनाई है।
कमेंट, राजस्थान के सीकर, भरतपुर, बांसवाड़ा और जयपुर समेत कई जिलों में दूषित कफ सिरप से बच्चों की मौतों ने स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है। अब तक कम से कम 2 मासूमों की जान जा चुकी है और कई की हालत बिगड़ी हुई है। सिरप पीने के बाद उल्टी, दस्त, सांस लेने में तकलीफ और किडनी फेलियर जैसे लक्षण सामने आए। अभिभावकों का कहना है कि यह दवा सरकारी डॉक्टरों की सलाह पर दी गई थी।
कमेंट विज़िट चंपावत। यू-कॉस्ट की ओर से डायट लोहाघाट की विशेष पहल पर वनाग्नि जागरूकता के लिए महत्वपूर्ण शोध कार्य किया जा रहा है। शोध के तहत जागरूकता गीतों के निर्माण पर जोर दिया जा रहा है। इन गीतों के माध्यम से वनाग्नि की घटनाओं की रोकथाम हो सकेगी।
गाजियाबाद ब्यूरोUpdated Sun, 11 Jan 2026 10:37 PM IST
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