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💢सब्सक्राइब💢सारमध्यप्रदेश में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे से जनजीवन प्रभावित है। कोहरे के कारण दिल्ली से भोपाल आने वाली कई ट्रेनें घंटों देरी से चल रही हैं। खजुराहो प्रदेश का सबसे ठंडा स्थान रहा, जबकि मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक ठंड और कोहरे के बने रहने की संभावना जताई है।
️डाउनलोड गेम,विकसित भारत युवा नेतृत्व संवादकौन है अरिहा शाह?अंबरनाथ नगर परिषदयूनियन बजट 2026-27भोपाल के रहमान डकैत की पूरी कहानीखुदरा महंगाई दर में उछालJagdeep DhankharShikhar Dhawan Engagement'मैं मुंबई आऊंगा, हिम्मत है तो मेरे पैर...'महारानी कामसुंदरी देवी को भतीजे ने दी मुखाग्नि
सारअंडे की सब्जी बनाने को लेकर दंपती में कहासुनी हुई थी। जिसके बाद युवक ने मौत को गले लगा लिया। घटना शहर कोतवाली क्षेत्र के शांतिनगर मोहल्ले की है।
लाइक, गोरखपुर ब्यूरोUpdated Mon, 12 Jan 2026 01:38 AM IST
वाराणसी ब्यूरोUpdated Mon, 12 Jan 2026 11:08 PM IST
बाराबंकी। अमेठी जिले से किशोर का अपहरण कर बाराबंकी में बंधक बनाकर 10 लाख रुपये की फिरौती वसूलने की तैयारी थी। फिरौती मांगे जाने से पहले ही किशोर ने साहस का परिचय देते हुए खुद को आजाद करा लिया। साथ ही उसकी सक्रियता से ग्रामीणों ने एक बदमाश को भी पकड़ लिया। अपहरण का मास्टर माइंड किशोर का पड़ोसी निकला। पुलिस ने रविवार को पूरी साजिश का खुलासा किया। इसमें शामिल तीन आरोपी जेल भेज दिए गए।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेरPublished by:अजमेर ब्यूरोUpdated Sun, 28 Dec 2025 10:44 PM IST
अर्न, जलबेड़ा। विभाग की कृषि कल्याणकारी योजनाओं को देखते हुए किसानों का झुकाव मिश्रित खेती की ओर बढ़ रहा है। वर्तमान में जलबेड़ा का किसान सुखमिंद्र सिंह मिश्रित खेती कर रहा है। उन्होंने बताया कि रबी के सीजन में 6 एकड़ सरसों की फसल लगाई है। जिसमें से चार एकड़ में पीली सरसों की सीधी बोआई की और दो एकड़ में मशीन से बैड बनाकर सरसों का अच्छी गुणवत्ता वाला बीज डाला। इसमें बरसीम की बिजाई भी की है। उन्होंने बताया कि विभाग की यह योजना कारगर सिद्ध हो रही है। सरसों पकने के बाद उनके पास बरसीम का बीज तैयार हो जाएगा। जिसका बाजार में रेट 100 से 120 रुपये प्रति किलो है। मिश्रित खेती से एकल फसल की अपेक्षा मुनाफा ज्यादा होता है।जलबेड़ा गांव में खेत में खड़ी सरसों व बरसीम की फसल। संवाद
साइन अप ईज़ी अल्मोड़ा में उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्र मुनस्यारी की प्रसिद्ध राजमा पर जलवायु परिवर्तन और मौसम का असर पड़ा है। एक दशक पहले तक जहां 1450-1800 मीटर की ऊंचाई पर राजमा की खेती होती थी, वहीं अब वर्तमान में 1800-2400 मीटर की ऊंचाई पर इसकी पैदावार हो रही हैं। एसएसजे परिसर अल्मोड़ा, कुमाऊं विवि और गढ़वाल केंद्रीय विवि के संयुक्त शोध में इस बात का खुलासा हुआ है।
फोटो-33- खेल मैदान में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते क्रिकेट खिलाड़ी।संवाद- फोटो : -कांग्रेस के जिलाध्यक्ष राम निवास यादव,महानगर अध्यक्ष शफात खान राजू व अन्य दाधिकारी। स्रोत स्वयं
इनाम, अमर उजाला नेटवर्क, जशपुरPublished by:अमन कोशलेUpdated Tue, 28 Oct 2025 08:15 PM IST







