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बिजनौर। मनरेगा बचाओ को लेकर कांग्रेसियों ने रविवार को शहर में विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद गांधी पार्क में पहुंचकर कांग्रेसियों ने विरोध स्वरूप उपवास रखा। आंदोलन कारियों ने सरकार से मनरेगा पर लिया गया फैसला वापस लेने की मांग की।
वॉच ऑनलाइन, छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में हत्या का एक मामला सामने आया है, जहां पुरानी रंजिश के चलते आरोपी ने लोहे की रॉड से मारकर युवक की हत्या कर दी है। यह मामला साजा थाना क्षेत्र के ग्राम जांता का है।
विस्तारFollow Usहिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में नशे के खिलाफ चल रही मुहिम में सदर पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने सुंगल के पास नाकाबंदी के दौरान एक पुलिस और बिजली बोर्ड के कर्मी को 2.85 ग्राम चिट्टा (हेरोइन) और 70,500 रुपये नकदी के साथ गिरफ्तार किया है। रविवार शाम सदर थाना पुलिस ने एसएचओ राजेश पराशर की अगुवाई में सुंगल के पास नाका लगाया। इसी दौरान कार नंबर एचपी-36ई-3132 नाके पर पहुंची। संदेह के आधार पर जब वाहन को रोककर तलाशी ली गई तो उसमें सवार दो व्यक्तियों के कब्जे से 2.85 ग्राम चिट्टा और 70,500 रुपये नकद बरामद किए गए।
अमर उजाला ब्यूरोUpdated Tue, 13 Jan 2026 01:35 AM IST
मासिक विथड्रॉ, विस्तारFollow Usभोपाल के पं. खुशीलाल आयुर्वेदिक महाविद्यालय ने किडनी स्टोन (पथरी) के इलाज को लेकर बड़ा दावा किया है। महाविद्यालय में किए गए 90 दिन के शोध में सामने आया है कि आयुर्वेदिक काढ़े के नियमित सेवन से 73 प्रतिशत मरीजों को बिना ऑपरेशन और बिना लेजर इलाज के राहत मिली है। शोध के दौरान कई मरीजों में पथरी का आकार धीरे-धीरे कम हुआ, जबकि कुछ मामलों में पथरी पूरी तरह शरीर से बाहर निकल गई। यह शोध किडनी स्टोन से पीड़ित उन मरीजों पर किया गया, जो लंबे समय से दर्द, जलन और पेशाब संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। शोध के दौरान मरीजों को विशेष आयुर्वेदिक औषधियों से तैयार काढ़ा दिया गया। इसके साथ ही खानपान, जीवनशैली और पानी पीने को लेकर जरूरी दिशा-निर्देश भी दिए गए। उपचार शुरू होने के कुछ ही हफ्तों में अधिकांश मरीजों को दर्द से राहत मिलने लगी और पथरी से जुड़ी परेशानियां कम होती चली गईं।
शेयर इनवाइट चंडीगढ़। शहर में क्रेश संचालन के नाम पर हुए खर्च में बड़ी अनियमितता सामने आई हैं। सामाजिक कल्याण, महिला एवं बाल विकास विभाग के रिकॉर्ड की ऑडिट जांच में 24.59 लाख रुपये का खर्च इनएडमिसिबल (अमान्य) करार दिया गया है। यह खुलासा वर्ष 2021-22 के दौरान 50 क्रेच के संचालन के लिए जारी अनुदान की जांच में हुआ।
'मौत के लिए बच्चों को सिरप देने वाली माताएं जिम्मेदार'- फोटो : अमर उजाला
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