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💢सुपर ईज़ी💢बिहार में ठंड का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। ठंड के साथ घना कोहरा लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहा है। पटना, गया, जहानाबाद, अरवल और नालंदा में शीत दिवस का अलर्ट जारी किया गया है। इतना नहीं पटना, गया समेत में आज अहले सुबह से घना कोहरा छाया है। इससे दृश्यता 50 मीटर से भी कम रह गई है। मौसम विज्ञान केंद्र ने बिहार के कई जिलों में मंगलवार को घने से बहुत घने कोहरे की चेतावनी दी है। इसे देखते हुए कई जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट और कुछ जिलों के लिए रेड अलर्ट घोषित किया गया है।
️नया लॉग इन,मामले को लेकर एसडीएम घुमारवीं को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग
विस्तारFollow Usछत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रदेश के मुख्य सूचना आयुक्त और आयुक्त की नियुक्ति के मापदंड को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है। जस्टिस एनके व्यास की सिंगल बेंच ने याचिका खारिज करने के साथ ही नियुक्ति पर लगी रोक भी हटा दी।
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अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद के संस्थापक एवं अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया- फोटो : अमर उजाला
सारसूरत पुलिस ने ईरानी गैंग के सरगना और कुख्यात अपराधी राजू ईरानी को गिरफ्तार किया। भोपाल पुलिस की टीम उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी। राजू ईरानी पर देशभर में 20 से अधिक अपराध दर्ज हैं और वह अमन कॉलोनी ईरानी डेरे का प्रमुख है।
पैसे, पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में 15 जनवरी से एक शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने जा रहा है, जिसका असर मध्यप्रदेश के मौसम पर भी साफ दिखाई देगा। मौसम विभाग का अनुमान है कि इस सिस्टम के प्रभाव से 2 से 3 दिन बाद प्रदेश के उत्तरी इलाकों में मावठा गिर सकता है। फिलहाल ग्वालियर, चंबल, रीवा और सागर संभाग में घना ठंडा मौसम बना हुआ है। मंगलवार सुबह प्रदेश के कई जिलों में कोहरे की चादर छाई रही। ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना और रीवा में मध्यम कोहरा दर्ज किया गया। राजधानी भोपाल और इंदौर समेत उज्जैन, खजुराहो, गुना, शिवपुरी, शाजापुर और सीहोर में भी कोहरे का असर देखा गया। हालांकि, अधिकतर इलाकों में दृश्यता 1 से 2 किलोमीटर तक बनी रही।
कलेक्ट सारबीजापुर जिले के उसूर विकासखंड के तहत संचालित पोर्टाकेबिन आवापल्ली में अध्ययनरत कक्षा छठवीं की छात्रा मनीषा सेमला की मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है।
सुकमा जिले के जगरगुंडा क्षेत्र से सामने आई एक तस्वीर ने एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल खोल दी है। बड़े-बड़े दावों के बावजूद, सुदूर आदिवासी इलाकों में जमीनी हकीकत चिंताजनक बनी हुई है। 21वीं सदी में भी, कागजों पर हाईटेक व्यवस्था के बावजूद, कई जगहों पर स्वास्थ्य सेवाएं आज भी खाट और कंधों के सहारे ही संचालित हो रही हैं।
डायमंड शेयर, अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुरPublished by:अमन कोशलेUpdated Thu, 06 Nov 2025 02:47 PM IST







