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पिपरहवा चौराहा। तुलसीपुर-हरैया मार्ग पर खैरी भट्टा के पास ट्रक को ओवरटेक करने के चक्कर में शनिवार शाम करीब 5:30 बजे ट्रैक्टर-ट्रॉली पलट गई। हादसे में तुलसीपुर क्षेत्र के ग्राम कल्यानपुर निवासी सुरेश कुमार वर्मा (32) की मौत हो गई। हादसे में गांव के ही ट्रैक्टर चालक रामसेवक गंभीर रूप से घायल हो गए। रामसेवक को सीएचसी तुलसीपुर में भर्ती कराया गया है।
पैसे, विस्तारFollow Usअनूपपुर जिला मुख्यालय में ओवर ब्रिज निर्माण का कार्य बीते 8 वर्षों से जारी है, लेकिन आज तक इसका कार्य अधूरा है। लगातार दो विभागों के बीच जारी खींचतान के कारण काफी आंदोलन और विरोध प्रदर्शन के बावजूद कार्य की रफ्तार में कोई सुधार नहीं होने से नगरवासी पूरी तरह से मायूस हैं। नगर के विकास को रफ्तार देने के लिए फ्लाईओवर ब्रिज निर्माण का यह कार्य किया जा रहा था, लेकिन आज तक यह कार्य अधूरा ही है, जिसकी वजह से अनूपपुर नगर दो हिस्सों में विभाजित हो गया है। एक हिस्से पर जिला चिकित्सालय, न्यायालय भवन तथा स्कूल और कॉलेज है तो दूसरे हिस्से पर कलेक्ट्रेट सहित विभिन्न विभागों के कार्यालय तथा मुख्य बाजार है।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर/बारांPublished by:सौरभ भट्टUpdated Fri, 14 Nov 2025 07:22 AM IST
सारउन्नाव रेप केस में न्यायालय के फैसले और अंकिता भंडारी हत्याकांड में भाजपा नेताओं के नाम सामने आने के बाद निष्पक्ष जांच एवं सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर महिला कांग्रेस सरगुजा ने शहर में कैंडिल मार्च निकाला और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।
ईज़ी गेट, बाराबंकी। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान में नो मैपिंग वाले मतदाताओं को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। जिले में करीब 86 हजार ऐसे मतदाता हैं, जिन्हें नोटिस भेजा जाएगा। इन नोटिसों का निस्तारण निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, सहायक एवं अतिरिक्त सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों काे लगाया गया। शनिवार को जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी की मौजूदगी में इन अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया।
छोटा मोबाइल संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठीUpdated Mon, 12 Jan 2026 12:30 AM IST
बालाघाट में महिला नक्सली ने आत्मसमर्पण किया है।- फोटो : अमर उजाला
वॉच, विस्तारFollow Usबारां के केलवाड़ा कस्बे की निकटवर्ती ग्राम पंचायत दांता में विधायक कोष से बने हाट बाजार में धांधली और प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। स्थानीय ग्रामीणों ने सरकार द्वारा बनाए गए चबूतरों को पूरी तरह नकार दिया है। 10 लाख रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत होने के बावजूद भी मौके पर कोई नया ठोस निर्माण नहीं हुआ। महज पूर्व में बने चबूतरों की मरम्मत कर खानापूर्ति कर दी गई।







