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️वेरिफाई विन,न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालोतराPublished by:बालोतरा ब्यूरोUpdated Wed, 07 Jan 2026 01:13 PM IST
विस्तारFollow Usवन्यजीव संरक्षण के लिए मशहूर बालाघाट जिले में एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। यहां एक मादा बाघ की संदिग्ध मौत के बाद उसके शव को गुपचुप तरीके से जलाने का मामला सामने आया है। इस घटना की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों तक न पहुंचाने और नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में दक्षिण बालाघाट वन मंडल के डीएफओ अधर गुप्ता के खिलाफ कार्रवाई की गई है। उन्हें चार्जशीट जारी कर 15 दिन में जवाब देने का आदेश दिया गया है।
इनाम मोबाइल, संवाद न्यूज एजेंसी, बांदाUpdated Fri, 09 Jan 2026 10:58 PM IST
सारइस दौरान प्रदर्शनकारियों ने राज्यपाल के नाम नायब तहसीलदार के माध्यम से ज्ञापन सौंपते हुए आदिवासियों और किसानों की विभिन्न मांगों को पूरा करने की मांग की।
नरेश मीणा पर हमला, समर्थकों के साथ धरने पर बैठे- फोटो : अमर उजाला
सारसमय से पहले जन्मी एक नवजात बच्ची ने ट्रांसपोजिशन ऑफ ग्रेट आर्टरीज (TGA) नामक जटिल जन्मजात हृदय रोग के लिए लखनऊ स्थित टेंडर पॉम हॉस्पिटल लाया गया था जहां उसकी अनुभवी कार्डियक टीम की देखरेख में सफल ओपन-हार्ट सर्जरी की गई।
विज़िट गेट, विस्तारFollow Us'जिन्हें नसीब नहीं छत, उनकी करें बात, सर्द हवाओं में खुले आसमां तले गुजर रही रात' किसी कवि की कविता की यह पंक्तियां बांसवाड़ा जिले में उन लोगों पर सटीक बैठ रही है, जो बेघर और जरूरतमंद हैं। सर्द हवाओं में जरूरतमंद ठिठुरने को मजबूर हैं, लेकिन जिला प्रशासन और नगर परिषद ने अभी तक ऐसे परिवारों को राहत देने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है।
मासिक फ्रेंड्स बागेश्वर। उत्तरायणी कौतिक के लिए नगर सज चुका है। मंदिर और पुल बिजली की रोशनी से जगमगाने लगे हैं। मेला स्थल नुमाइशखेत मैदान में झूले लग चुके हैं। मंच निर्माण का काम अंतिम चरण में चल रहा है। कल विधिवत रूप से मेले का शुभारंभ किया जाएगा।
विस्तारFollow Usजिले के हीरजी दईडा गांव में रविवार को एक किशोर पर हमला कर घर में घुसे लेपर्ड की कुछ देर बाद हुई मौत का कारण सामने आ गया है। लेपर्ड की मौत भूख से हुई थी। पेट खाली होने और फेफड़ों में पानी भरने से सेप्टीसीमिया के लक्षण भी सामने आए हैं।
ऑनलाइन डिपॉजिट, अल्मोड़ा में उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्र मुनस्यारी की प्रसिद्ध राजमा पर जलवायु परिवर्तन और मौसम का असर पड़ा है। एक दशक पहले तक जहां 1450-1800 मीटर की ऊंचाई पर राजमा की खेती होती थी, वहीं अब वर्तमान में 1800-2400 मीटर की ऊंचाई पर इसकी पैदावार हो रही हैं। एसएसजे परिसर अल्मोड़ा, कुमाऊं विवि और गढ़वाल केंद्रीय विवि के संयुक्त शोध में इस बात का खुलासा हुआ है।







