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💢साप्ताहिक कलेक्ट💢ज्ञानपुर। जिले में प्री-बोर्ड परीक्षा की तैयारी रविवार की शाम तक पूरी कर ली गई है। सोमवार को सभी 193 माध्यमिक और इंटरमीडिएट कॉलेजों में परीक्षा कराई जाएगी। जीआईसी से सभी स्कूलों ने रिजर्व प्रश्नपत्रों का सेट प्राप्त कर लिया है। डीआईओएस ने सभी प्रधानाचार्याें को 12 से 21 जनवरी के मध्य प्री बोर्ड परीक्षा कराने के निर्देश दिए हैं। जिले में 18 फरवरी से यूपी बोर्ड परीक्षा शुरू होगी। परीक्षार्थियों को बोर्ड परीक्षा में कोई दिक्कत न हो इसलिए स्कूलों में प्री-बोर्ड परीक्षा कराई जा रही है। 12 से 21 जनवरी तक होने वाली प्री-बोर्ड परीक्षा के लिए दो से छह जनवरी तक विभूति नारायण राजकीय इंटर कॉलेज से अतिरिक्त (रिजर्व) प्रश्नपत्रों को वितरित किया गया। इससे छात्र-छात्राएं वास्तविक बोर्ड परीक्षा के स्तर का अनुभव प्राप्त कर सकेंगे। जिले में हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के 54 हजार 371 परीक्षार्थी प्री-बोर्ड परीक्षा में शामिल होंगे। जिला विद्यालय निरीक्षक अंशुमान ने बताया कि सभी 193 विद्यालयों ने परीक्षा की तैयारी को पूरी कर ली है। परीक्षा का प्रश्नपत्र पैटर्न, अंक विभाजन और समय-सीमा यूपी बोर्ड की मुख्य परीक्षा के अनुरूप होगी। इससे विद्यार्थियाें को परीक्षा के दबाव, समय प्रबंधन व प्रश्नों की प्रकृति को समझने में मदद मिलेगी। इस परीक्षा को भी सीसीटीवी की निगरानी में कराया जाएगा। परीक्षा 12 से 21 जनवरी के बीच आयोजित की जाएगी। उन्होंने सभी प्रधानाचार्यों को निर्देश दिए कि परीक्षा में लापरवाही न की जाए।
️डिस्काउंट गेम,भिवानी। पिछले तीन माह से जिले के करीब 45 हजार एकड़ खेतों में तबाही मचाने वाला बरसाती पानी अब जलघर के टैंकों में प्रदूषण का जहर घोलने लगा है। सिंचाई विभाग की अथक कोशिशों से जलभराव में डूबे गांवों के आबादी क्षेत्र से पानी की निकासी करा दी गई है लेकिन बवानीखेड़ा और तोशाम क्षेत्र के कुछ गांव अभी भी बरसाती जलभराव की मार झेल रहे हैं। जाटूलुहारी, दांग खुर्द और रिवासा सहित प्रेमनगर व तिगड़ाना के खेतों में जमा बरसाती पानी किसानों के लिए नासूर बना हुआ है। कई महीनों तक ड्रेनों के जरिए पानी की निकासी कराई गई लेकिन अब बड़ी नहरों और डिस्ट्रीब्यूटरी नहरों में भी खेतों का सड़ चुका दूषित पानी छोड़ा जा रहा है जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के जलघर टैंकों में प्रदूषण का जहर पहुंच रहा है। जिन गांवों के जलघर जलभराव के दौरान डूब गए थे उनके टैंक अब भी बदहाल पड़े हैं और सफाई के लिए अधिकारी बजट का इंतजार कर रहे हैं।
डायमंड कमेंट, अमर उजाला ब्यूरोUpdated Sun, 11 Jan 2026 02:01 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शेखपुराPublished by:शबाहत हुसैनUpdated Wed, 24 Dec 2025 07:24 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़Published by:अंकेश ठाकुरUpdated Mon, 12 Jan 2026 06:39 PM IST
सुकमा जिले के जगरगुंडा क्षेत्र से सामने आई एक तस्वीर ने एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल खोल दी है। बड़े-बड़े दावों के बावजूद, सुदूर आदिवासी इलाकों में जमीनी हकीकत चिंताजनक बनी हुई है। 21वीं सदी में भी, कागजों पर हाईटेक व्यवस्था के बावजूद, कई जगहों पर स्वास्थ्य सेवाएं आज भी खाट और कंधों के सहारे ही संचालित हो रही हैं।
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पैसे क्लिक अमर उजाला नेटवर्क, बिजनौरPublished by:मोहम्मद मुस्तकीमUpdated Mon, 12 Jan 2026 11:55 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बीकानेरPublished by:अमर उजाला ब्यूरोUpdated Wed, 12 Nov 2025 08:47 PM IST
विशेष विज़िट, न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपालPublished by:भोपाल ब्यूरोUpdated Mon, 12 Jan 2026 11:24 PM IST







