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️बोनस,विस्तारFollow Usजाति है कि जाती नहीं... बिहार के लिए हमेशा यह कहा जाता रहा है। चुनावों में तो खासकर। लेकिन, बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में नीतीश कुमार सरकार की वापसी के लिए मतदाताओं ने इन कहावतों को किनारे कर एकतरफा मतदान किया। परिणाम सामने है। यादव और मुस्लिम के नाम का समीकरण रखने वाली पार्टी बुरी तरह पराजित हुई। इसके साथ ही एक बात चर्चा में आ गई कि अरसे बाद बिहार विधानसभा एक खास जाति के दबदबे से बाहर निकल रहा है। इस बार विधायकों का जातीय समीकरण बहुत हद तक अलग है। दलित भी खूब हैं, सवर्ण भी मजबूत। देखिए, पूरा गणित।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांकाPublished by:भागलपुर ब्यूरोUpdated Sun, 21 Dec 2025 07:35 PM IST
ऑफर ट्रांसफर, विस्तारFollow Usभरतपुर में एसीबी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए भुसावर थाने में तैनात एएसआई उदय सिंह को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। कार्रवाई एएसपी अमित कुमार के निर्देशन में की गई।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भीलवाड़ाPublished by:हिमांशु प्रियदर्शीUpdated Thu, 01 Jan 2026 03:59 PM IST
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरीUpdated Sun, 11 Jan 2026 01:53 AM IST
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पैसे ट्रांसफर, छत्तीसगढ़ सरकार ने संस्थागत स्वच्छता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक अभिनव पहल की शुरुआत की है। मनेन्द्रगढ़-भरतपुर-चिरमिरी जिले के विकासखंड खड़गवां से आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने ‘जर्नी ऑफ सेनिटेशन हाइजिन’ (जोश) कार्यक्रम का हरी झंडी दिखाकर औपचारिक शुभारंभ किया।
साप्ताहिक सब्सक्राइब भिवानी। पिछले तीन माह से जिले के करीब 45 हजार एकड़ खेतों में तबाही मचाने वाला बरसाती पानी अब जलघर के टैंकों में प्रदूषण का जहर घोलने लगा है। सिंचाई विभाग की अथक कोशिशों से जलभराव में डूबे गांवों के आबादी क्षेत्र से पानी की निकासी करा दी गई है लेकिन बवानीखेड़ा और तोशाम क्षेत्र के कुछ गांव अभी भी बरसाती जलभराव की मार झेल रहे हैं। जाटूलुहारी, दांग खुर्द और रिवासा सहित प्रेमनगर व तिगड़ाना के खेतों में जमा बरसाती पानी किसानों के लिए नासूर बना हुआ है। कई महीनों तक ड्रेनों के जरिए पानी की निकासी कराई गई लेकिन अब बड़ी नहरों और डिस्ट्रीब्यूटरी नहरों में भी खेतों का सड़ चुका दूषित पानी छोड़ा जा रहा है जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के जलघर टैंकों में प्रदूषण का जहर पहुंच रहा है। जिन गांवों के जलघर जलभराव के दौरान डूब गए थे उनके टैंक अब भी बदहाल पड़े हैं और सफाई के लिए अधिकारी बजट का इंतजार कर रहे हैं।
रात में अलाव के सहारे बैठे किसान फसल की रखवाली करते हुए। संवाद
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