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💢शेयर कलेक्ट💢मुक्तसर के लंबी क्षेत्र के गांव आलमवाला में कार नहर में गिर गई। इससे मां और ढाई साल की बच्ची की डूबने से मौत हो गई। कार के नहर में गिरने के बाद ड्राइवर खिड़की खुलने से बह गया और झाड़ियां हाथ में आने से वह बच गया।
️डिस्काउंट डिपॉजिट,10 जनवरी से शुरू होने जा रहा है बस्तर पंडुम- फोटो : अमर उजाला
चरखी दादरी। पहले मनरेगा योजना में काफी भ्रष्टाचार होता था। जिसकी शिकायतें लगातार मिलती थीं। नई व्यवस्था लागू होने से जहां भ्रष्टाचार पर पूरी तरह से अंकुश लगेगा। वहीं वीबी-जी-राम-जी योजना वर्ष 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने में महत्वपूर्ण साबित होगी। यह बात भिवानी-महेंद्रगढ़ क्षेत्र से लोकसभा सांसद धर्मबीर सिंह ने शनिवार को दादरी में विधायक सुनील सांगवान के निवास स्थान पर पत्रकारों से बात करते हुए कही। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाना नहीं, बल्कि योजना को और अधिक प्रभावी बनाना है। कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान इस योजना के कई बार नाम बदले गए हैं।
वीआईपी वीडियो, अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़Published by:शाहिल शर्माUpdated Mon, 12 Jan 2026 07:01 PM IST
छत्तीसगढ़ में 14 नवंबर 2025 से शुरू हुआ धान खरीदी अभियान अब महाअभियान का रूप ले चुका है। राज्य में अब तक 16.95 लाख पंजीकृत किसानों से 93.12 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की जा चुकी है। समर्थन मूल्य के तहत किसानों को अब तक 20 हजार 753 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे उनके बैंक खातों में दी जा चुकी है। समय पर भुगतान से न केवल किसानों का भरोसा बढ़ा है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है।
विस्तारFollow Usआज शुक्रवार को बेमेतरा जिले के कठिया गांव में छत्तीसगढ़ बांस तीर्थ संकल्पना सम्मेलन का आयोजन हुआ। सम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री अरुण साव, कैबिनेट मंत्री दयालदास बघेल समेत जिले के जनप्रतिनिधि मौजदू थे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बांस के महत्व, इसके आर्थिक लाभ तथा किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में केंद्र व राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे महत्वपूर्ण प्रयासों पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांस को घास की श्रेणी में शामिल करने के ऐतिहासिक फैसले ने किसानों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोले हैं।
डाउनलोड विन, विस्तारFollow Usसुकमा जिले के जगरगुंडा क्षेत्र से सामने आई एक तस्वीर ने एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल खोल दी है। बड़े-बड़े दावों के बावजूद, सुदूर आदिवासी इलाकों में जमीनी हकीकत चिंताजनक बनी हुई है। 21वीं सदी में भी, कागजों पर हाईटेक व्यवस्था के बावजूद, कई जगहों पर स्वास्थ्य सेवाएं आज भी खाट और कंधों के सहारे ही संचालित हो रही हैं।
मासिक विज़िट सारबीजापुर नगर की सबसे बड़ी और बहुप्रतीक्षित जरूरत बन चुकी बायपास सड़क आज भी केवल कागज़ों और फाइलों तक सीमित है। बीते 12 वर्षों से बीजापुर बायपास सड़क का प्रस्ताव सरकारी दफ्तरों में धूल खा रहा है।
चंडीगढ़ ब्यूरोUpdated Tue, 13 Jan 2026 02:56 AM IST
सर्वे ऑनलाइन, दधोल, निहारी, डंगार, लढयाणी, बाडा दा घाट, कुठेड़ा चौक पर की गतिविधियां







