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💢पुराना डिस्काउंट💢घोसिया जामा मस्जिद के पास बंद पड़ा स्ट्रीट लाइट । संवाद
️गोल्ड विज़िट,संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरीUpdated Mon, 12 Jan 2026 10:30 PM IST
सारआवेदन का प्रारूप विभाग की वेबसाइट http://mpwcdmis.gov.inपर उपलब्ध है या जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय से प्राप्त किया जा सकता है। अधिकांश पुरस्कारों की अंतिम तिथि 15 नवंबर 2025 है, जबकि कुछ के लिए 5 जनवरी 2026 तक आवेदन किए जा सकते हैं।
वॉच, विस्तारFollow Usबचपन में कटी हुई पतंग तो सभी ने लूटी होगी। इस दौरान कई बार दोस्तों के बीच लूटी हुई पतंग को लेकर आपस में या उसके मालिक के साथ विवाद भी हुए होंगे। लेकिन, बुरहानपुर में पतंग लूटने की बात पर उसके मालिक और लूटने वाले युवक के बीच विवाद मारपीट तक पहुंच गया।
अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुरPublished by:अनुज कुमारUpdated Thu, 01 Jan 2026 07:28 PM IST
T20 WCसोना-चांदी में ऐतिहासिक उछालWest Bengalविकसित भारत युवा नेतृत्व संवादकौन है अरिहा शाह?यूपी में एसआईआरयूपीBihar Newsप्रत्यक्ष कर संग्रह में 9% का उछालदिल्ली में फिर टूटा ठंड का रिकॉर्ड
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुरPublished by:अमन कोशलेUpdated Sun, 11 Jan 2026 12:41 PM IST
अल्ट्रा डिपॉजिट,
डाउनलोड अर्न सारछतरपुर जिले में अप्रैल से नवंबर 2025 तक 16,912 डिलीवरी में 402 नवजात बच्चों की मृत्यु हुई। सबसे अधिक मौतें छतरपुर ब्लॉक में हुईं। सीएमएचओ ने बताया कि हाई-रिस्क श्रेणी के बच्चों की पहचान और समय पर उपचार के जरिए नवजात मृत्यु दर को कम करने के प्रयास जारी हैं।
ईरान में दो हफ्ते पहले शुरू हुआ सरकार विरोधी आंदोलन अब विशाल रूप ले चुका है। आर्थिक संकट और बढ़ती महंगाई के असर के चलते शुरू हुए विरोध प्रदर्शन देखते ही देखते ईरान के सभी 31 प्रांतों में फैल चुके हैं। स्थिति यह है कि तेहरान में व्यापारियों का गढ़ कहे जाने वाला ग्रैंड बाजार इन प्रदर्शनों का केंद्र बना हुआ है और आर्थिक संकट के खिलाफ उठी आवाज अब सत्ता परिवर्तन की आवाज में बदल चुकी है। इस आंदोलन में अब तक 646 लोगों की मौत का दावा किया जा रहा है, जबकि 10 हजार से अधिक लोगों को हिरासत में लिए जाने की बात सामने आ रही है।
सब्सक्राइब, उत्तराखंड में इस साल कम बर्फबारी और बारिश ने राज्य की आर्थिकी पर गहरी चोट की है। इससे न सिर्फ पहाड़ों में पर्यटन कारोबार प्रभावित हुआ है बल्कि फसलों पर भी मार पड़ी है। यही नहीं बारिश और बर्फबारी न होने से जंगल में आग की घटनाएं भी बढ़ी हैं। स्थिति यह है कि 12,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित तुंगनाथ में आमतौर पर दिसंबर में बर्फ की चादर जम जाती थी, लेकिन इस वर्ष जनवरी के करीब मध्य तक क्षेत्र पूरी तरह बर्फ विहीन बना हुआ है। यहां पर पहली बार ऐसी स्थिति देखी जा रही है। इससे विशेषज्ञ भी पौधों के प्राकृतिक जीवन चक्र प्रभावित होने की आंशका जता रहे हैं। राहत की बात है कि जनवरी के दूसरे सप्ताह के बाद से बारिश और बर्फबारी की संभावना जताई जा रही है।







