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️विन इंस्टेंट,संवाद न्यूज एजेंसी, बांदाUpdated Sun, 11 Jan 2026 11:33 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बड़वानीPublished by:अर्पित याज्ञनिकUpdated Mon, 24 Nov 2025 10:50 AM IST
पैसे गेट, न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालोतराPublished by:बालोतरा ब्यूरोUpdated Sat, 06 Dec 2025 07:49 PM IST
इंदिरा गांधी स्टेडियम में रविवार को क्रिकेट टूर्नामेंट में बैटिंग करता खिलाड़ी। -संवाद
कप्तानगंज। गन्ना लदे ट्रक-ट्राला राहगीरों लिए खतरा बना हुए हैं। जिम्मेदार इन पर कार्रवाई करने से कतरा रहे हैं। स्थानीय लोगों ने गन्ना लदे ओवरहाईट वाहनों के संचलन पर रोक लगाने की मांग की है। कप्तानगंज थाना क्षेत्र में मसौधा, बभनान, मुंडेरवा, रुधौली सहित कई चीनी मिलों का गन्ना क्रय केंद्र है। इन केंद्रों से प्रतिदिन सैकड़ों गन्ना लदे ओवरहाईट ट्रक-ट्राला कप्तानगंज चौराहे से गुजरते हैं। ओवरहाईट होने के चलते वाहनों के पलटने का खतरा बना रहता है।
सिकंदरपुर। नगरा थाना क्षेत्र के सरियाव मनोवीर गांव में शनिवार देर रात अज्ञात कारण से लगी आग में 12 झोपड़ी जलकर राख हो गई। सामुदायिक शौचालय के पास एक के बाद मड़ई जलकर खाक होती गईं। हादसे में लाखों रुपये का घरेलू सामान, अनाज और जरूरी वस्तुएं जलकर राख हो गईं। परिवार खुले आसमान के नीचे आ गए हैं।
टास्क ऑफर, राज्य सरकार ने जिलों के पुनर्गठन की प्रक्रिया के तहत बालोतरा और बाड़मेर जिलों की सीमाओं में आंशिक बदलाव किया है। इस नए आदेश की अधिसूचना शुक्रवार देर रात सामने आने के बाद यह मामला तेजी से चर्चा में आ गया। सोशल मीडिया पर आदेश वायरल होते ही दोनों जिलों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कहीं लोगों ने इस फैसले का स्वागत किया तो कहीं असंतोष और नाराजगी भी दिखाई दी।
रिवॉर्ड्स पेसा एक्ट दिवस के अवसर पर सरगुजा जिला के लखनपुर विकासखंड के खदान प्रभावित ग्राम परसोडी कला में ग्रामसभा एवं संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में आसपास के गांवों के बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। बाहर से पहुंचे वक्ताओं ने ग्रामवासियों को पेसा कानून और उसके नियमों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी।
विस्तारFollow Us1 नवंबर 1983, यह वह ऐतिहासिक दिन था जब राजस्थान के दक्षिणी सिरे पर बसे जनजाति बहुल बांसवाड़ा जिले की तकदीर बदलनी शुरू हुई। इसी दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कागदी पिकअप वियर पर बटन दबाकर माही बांध की नहरों में जलप्रवाह शुरू किया, जिसने इस क्षेत्र के जीवन, भूमि और विकास की दिशा ही बदल दी। उस पल के साथ ही बांसवाड़ा का नाम ‘कालापानी’ से निकलकर ‘हराभरा जनपद’ के रूप में प्रसिद्ध हुआ।
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