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💢ट्रांसफर रिसीव💢आजमगढ़। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत ग्राम पंचायतों में कराए गए कच्चे कार्यों में फर्जीवाड़ा उजागर हुआ हुआ। सामने आ रहा है। योजना की पारदर्शिता के लिए लागू नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (एनएमएमएस) एप अब घोटाले का माध्यम बनता दिख रहा है। ऑनलाइन हाजिरी के नाम पर एक ही फोटो को बार-बार अलग-अलग कार्यों में और अलग-अलग दिन अपलोड कर मजदूरी का भुगतान कराया जा रहा है।
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जरवलरोड। लखनऊ–बहराइच हाईवे पर ग्रामसभा झुकिया में रविवार शाम उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक ट्रक सड़क किनारे दलदल में फंस गया। एक ढाबे के पास ट्रक फंसने से मार्ग पर वाहनों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हो गई।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालाघाटPublished by:बालाघाट ब्यूरोUpdated Tue, 04 Nov 2025 12:05 PM IST
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का दौरा कल- फोटो : अमर उजाला
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कम्पलीट कूपन पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह एवं जिला कांग्रेस सरगुजा के जिलाध्यक्ष बालकृष्ण पाठक ने शनिवार को राजीव भवन अंबिकापुर में पत्रकार वार्ता करते हुए केंद्र की मोदी सरकार पर मनरेगा को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने वर्ष 2005 में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम पारित कर ग्रामीण मजदूरों को काम की संवैधानिक गारंटी दी थी, जिससे अब तक 180 करोड़ से अधिक कार्यदिवस सृजित हुए और 10 करोड़ से ज्यादा परिसंपत्तियों का निर्माण हुआ।
सिवाना उपखंड क्षेत्र के तेलवाड़ा गांव की सरहद में रविवार को सनसनी फैल गई, जब ग्रामीणों ने एक खेत में कंकाल जैसी हालत में पड़े शव को देखा। शव की स्थिति इतनी भयावह थी कि मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई और इलाके में दहशत का माहौल बन गया। ग्रामीणों की सूचना पर सिवाना थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। पुलिस ने शुरुआती जांच और पहचान प्रक्रिया के बाद मृतक की पहचान जालोर जिले के बिशनगढ़ थाना क्षेत्र के ऐलाना गांव निवासी 30 वर्षीय बूटाराम पुत्र खेकाराम भील के रूप में की। बूटाराम पिछले करीब एक सप्ताह से लापता था और परिजनों ने पहले ही उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी।
टास्क रजिस्टर, अंबेडकरनगर । शहर स्थित अकबरपुर स्टेशन के मखदूमपुर रेलवे क्रासिंग से गुजरती रेलवे लाइन लोगों के लिए मुशीबत बन चुकी है। 24 घंटों में 50 बार रेलवे क्रासिंग बंद होती है और लोगों को घंटों खड़े रहकर इंतजार करना पड़ता है। जब ट्रेनें गुजरती हैं, तो फाटक बंद हो जाता है और लोग जाम में फंस जाते हैं। इस मार्ग से करीब 150 गांवों के लोगों का प्रतिदिन आवागमन होता हैं।







