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️पुराना सब्सक्राइब,अमर उजाला नेटवर्क, बाराबंकीPublished by:ishwar ashishUpdated Mon, 12 Jan 2026 08:39 PM IST
कांग्रेस शासन में भूपेश बघेल सरकार के दौरान खोले गए स्वामीआत्मानंद स्कूल निपनिया में विधायक इन्द्र साव ने आकस्मिक निरीक्षण किया, जिसमें भारी अनियमितताएं सामने आईं। स्कूल में शौचालय और कक्षाओं में गंदगी पाई गई, अवैध शुल्क वसूली की जानकारी मिली और संस्था के प्राचार्य बिना सूचना स्कूल से अनुपस्थित मिले। इस पर नाराजगी व्यक्त करते हुए विधायक ने दूरभाष पर कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी को पूरे मामले से अवगत कराया और जांच व कार्रवाई की मांग की।
गोल्ड विथड्रॉ, बालाघाट में महिला नक्सली ने आत्मसमर्पण किया है।- फोटो : अमर उजाला
विस्तारFollow Usसंगम की रेती पर माघ मेले ने भव्य स्वरूप लेना शुरू कर दिया है। संगम तट पर हर दिन देश ही नहीं विदेश से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु संगम में आस्था की डुबकी लगाने पहुंच रहे है। अध्यात्म और भक्ति से सराबोर माघ मेले में साधु-संत अलग-अलग भेषभूषा और बोली से चर्चा में हैं। इन्हीं में एक हैं सेंट वाले बाबा। वह संगम लोवर मार्ग पर धूनी रमाए रेती पर भक्ति रस बांट रहे हैं।
अंबरनाथ नगर परिषदशक्सगाम घाटी पर भारत की लताड़ से बौखलाया चीनयूनियन बजट 2026-27भोपाल के रहमान डकैत की पूरी कहानीखुदरा महंगाई दर में उछालJadeep DhankharShikhar Dhawan Engagement'मैं मुंबई आऊंगा, हिम्मत है तो मेरे पैर...'महारानी कामसुंदरी देवी को भतीजे ने दी मुखाग्निडिलीवरी बॉय बने राघव चड्ढा
डाउनलोड, सारबाड़मेर जिले के भेडाणा ग्राम पंचायत में रात्रि चौपाल के दौरान जिला कलेक्टर टीना डाबी ने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं। सर्द रात में कई परिवादों का मौके पर ही निस्तारण कर अधिकारियों को समयबद्ध समाधान के निर्देश दिए, जिससे ग्रामीणों को त्वरित राहत मिली।
इनवाइट सारघटना रविवार तड़के हुई, जब दोनों चीते जंगल पार कर हाईवे क्रॉस कर रहे थे। वन विभाग और पुलिस टीम मौके पर पहुंची, लेकिन पूरी कार्रवाई वन विभाग की निगरानी में हुई। मृत चीते को पोस्टमॉर्टम के लिए कूनो भेज दिया गया है। दू
सारपीसीसी सचिव ने अरावली पर्वतमाला की परिभाषा में किए गए हालिया बदलाव पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे पर्यावरण संतुलन के लिए गंभीर खतरा बताया है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में 100 मीटर से कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में खनन की अनुमति दी है। ऐसे में 100 मीटर से नीचे के भूभाग को अब अरावली पहाड़ी नहीं माना जाएगा।
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