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💢छोटा विथड्रॉ💢गडवार/चिलकहर। सरकार जहां एक ओर डिजिटल इंडिया और सुशासन का दावा करते है लेकिर ज़मीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। हालत यह है कि जन्म प्रमाणपत्र जैसे बुनियादी दस्तावेज़ को बनवाना में लोगों का एक से दो हजार रुपये खर्च करना पड़ रहा है। वहीं, तहसील व ब्लाक चक्कर काटना अलग से हो जा रहा है। लोगों का आरोप है कि जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए उनसे 1000 से लेकर 2000 रुपये तक की अवैध वसूली की जा रही है। कभी सर्वर डाउन, कभी बाबू साहब छुट्टी पर तो कभी दस्तावेज़ अधूरे बताकर वापस कर दिया जाता है। पीड़िता राजकुमारी देवी, ब्रजेश पांडेय, संतोष सिंह, पंकज गुप्ता आदि का कहना है कि दो महीने से दौड़ रहे हैं। हर बार कोई नई कमी निकाल देते हैं। आखिर में साफ़ बोल दिया गया कि 1500 रुपये दे दो, तभी बनेगा।
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हैदरगढ़। स्थानीय सीएचसी पर ब्लड बैंक व आईसीयू स्थापित करने की जरूरत है। यह बात सोमवार को विशेषज्ञों की टीम के सीएचसी के निरीक्षण और संसाधनों की समीक्षा के दौरान सामने आई।
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगर मालवाPublished by:अमर उजाला ब्यूरोUpdated Sun, 03 Aug 2025 08:59 PM IST
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पटना उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सुनील कुमार पंवार।- फोटो : अमर उजाला
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