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💢डिस्काउंट वीडियो💢बांदा। इंदौर में दूषित पानी के सेवन से मौतों के बाद भी जिम्मेदार चेत नहीं रहे हैं। शहर में 56 हजार परिवारों को शुद्ध पीने का पानी मुहैया कराने के दावे जमीनी सच्चाई के सामने तालमेल नहीं खा रहे। केन नदी व नलकूपों से पानी स्टोर करने के लिए बनी पानी की टंकियां सालों से साफ नहीं हुई। हालांकि किसी टंकी में मई तो किसी में अप्रैल महीने में सफाई का उल्लेख किया गया है।
️मोबाइल स्टूडेंट,विस्तारFollow Usअमृतसर के कस्बा वल्टोहा के आम आदमी पार्टी के सरपंच जरमल सिंह की हत्या के मामले में पुलिस ने रायपुर (छत्तीसगढ़) से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। घटना चार जनवरी की शाम वेरका स्थित मेरी गोल्ड मैरिज पैलेस में हुई थी जहां आरोपियों ने सरपंच जरमल सिंह के सिर में गोली मारकर उनकी हत्या कर दी थी।
अमर उजाला नेटवर्क, भाटापाराPublished by:Digvijay SinghUpdated Sat, 01 Nov 2025 07:54 PM IST
पॉइंट्स सर्वे,
जिम्मेदारी तो जट्टारी नगर पंचायत की है कि सभी रास्तों और गलियों में रात के समय प्रकाश रहे लेकिन नगर पंचायत ऐसा नहीं कर सकी। लिहाजा लोगों ने स्वयं से अपने-अपने घरों के बाहर बल्ब टांग रखे हैं ताकि रात के समय गली में रोशनी रहे और अंधेरे में गलियों में हादसे, घटनाओं से वह सुरक्षित रह सकें।
विस्तारFollow Usआगामी पंचायत चुनावों को लेकर बानसूर उपखंड में हलचल तेज हो गई है। इसी कड़ी में उपखंड प्रशासन ने ग्राम पंचायतों के वार्डों के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। राज्य सरकार से मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए उपखंड अधिकारी अनुराग हरित ने पंचायती राज अधिनियम 1994 के तहत उपखंड की 23 ग्राम पंचायतों में वार्डों के पुनर्गठन का प्रारूप आधिकारिक रूप से जारी कर दिया है। इस घोषणा के बाद पूरे क्षेत्र में चुनावी माहौल बन गया है, क्योंकि नए वार्ड बनने से कई राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। उपखंड अधिकारी अनुराग हरित ने बताया कि वार्डों का नया निर्धारण वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाकर किया गया है। प्रशासन ने कोशिश की है कि वार्डों का बंटवारा पूरी तरह न्यायसंगत हो और सभी वार्डों में जनसंख्या का संतुलन बना रहे।
बस्ती। नगर पालिका की ओर से शहर में साफ स्वच्छ पेयजल जलापूर्ति का दावा किया जा रहा है, मगर, शहर में बने ओवरहेड टैंकों की डेढ़ साल से सफाई ही नहीं कराई गई है। नगर पालिका अधिकारी बजट न होने का हवाला दे रहे हैं। वहीं दूषित पानी की सप्लाई से लोगों को सेहत को नुकसान का खतरा सता रहा है।
कम्पलीट वेरिफाई, अंबारी। अहरौला ब्लाक के ग्राम पंचायत ओरिल में लगभग 1.60 करोड़ रुपये की लागत से बनी पानी की टंकी बीते तीन वर्षों से शोपीस बनी हुई है। जल निगम ने शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ओरिल ग्राम पंचायत का चयन किया गया था। 20 हजार की आबादी और 28 पुरवों में फैले इस गांव में टंकी निर्माण के बाद लोगों को उम्मीद जगी थी कि अब पीने के पानी की समस्या खत्म होगी, लेकिन घटिया निर्माण सामग्री और तकनीकी खामियों से काम रुक गया। प्रधान राम अवतार यादव का कहना है कि करीब तीन साल से टंकी से पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। टंकी पर लगा ट्रांसफॉर्मर जल चुका है और पाइपलाइन में भारी लीकेज है। आबादी और क्षेत्रफल को देखते हुए गांव में कम से कम तीन टंकियों की आवश्यकता है। घटिया पाइप और सामान लगाने के कारण टंकी को अब तक हैंडओवर नहीं लिया गया है। वहीं, पूर्व प्रधान बिनोद यादव, संजय यादव सहित जगदीश बिंद, सियाराम गुप्ता, अरविंद समेत कई ग्रामीणों ने टंकी को तत्काल चालू कराने की मांग की है।
साइन अप बाल श्रम के लिए ले जाए जा रहे बच्चों की जानकारी देते चाइल्ड लाइन प्रभारी- फोटो : अमर उजाला
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