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💢सुपर अर्न💢अयोध्या। सिविल लाइन स्थित गांधी पार्क में कांग्रेस पार्टी ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) से राष्ट्र पिता महात्मा गांधी का नाम हटाए जाने के विरोध में उपवास रखा। योजना के प्रारूप में किए जा रहे बदलावों के विरोध में एक दिवसीय उपवास रखा गया। जिला अध्यक्ष चेत नारायण सिंह ने कहा कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत की जीवनरेखा है। मनरेगा के प्रारूप में बदलाव और गांधी जी का नाम हटाने की मंशा यह दर्शाती है कि केंद्र सरकार की नीयत और नीति दोनों ही मजदूर-किसान विरोधी हैं।

️पॉइंट्स रिसीव,02-प्रेस क्लब में पत्रकारों से वार्ता करते पूर्व सांसद निर्मल खत्री।-संवाद

सारसमय से पहले जन्मी एक नवजात बच्ची ने ट्रांसपोजिशन ऑफ ग्रेट आर्टरीज (TGA) नामक जटिल जन्मजात हृदय रोग के लिए लखनऊ स्थित टेंडर पॉम हॉस्पिटल लाया गया था जहां उसकी अनुभवी कार्डियक टीम की देखरेख में सफल ओपन-हार्ट सर्जरी की गई।

डाउनलोड, विस्तारFollow Usअल्मोड़ा में उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्र मुनस्यारी की प्रसिद्ध राजमा पर जलवायु परिवर्तन और मौसम का असर पड़ा है। एक दशक पहले तक जहां 1450-1800 मीटर की ऊंचाई पर राजमा की खेती होती थी, वहीं अब वर्तमान में 1800-2400 मीटर की ऊंचाई पर इसकी पैदावार हो रही हैं। एसएसजे परिसर अल्मोड़ा, कुमाऊं विवि और गढ़वाल केंद्रीय विवि के संयुक्त शोध में इस बात का खुलासा हुआ है।

सारपुलिस ने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, जीतू पटवारी और अन्य नेताओं के काफिले को कई जगह रोका। सत्याग्रह के अंत में मंच से पटवारी समेत सभी को गिरफ्तार करने की घोषणा की गई, लेकिन तत्काल रिहा भी कर दिया गया। यह विरोध अशोकनगर निवासी गजराज लोधी प्रकरण को लेकर हो रहा है, जिसमें जीतू पटवारी पर बहकाने का आरोप लगाकर FIR दर्ज की गई थी।

संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइचUpdated Sun, 11 Jan 2026 01:31 AM IST

गौरीगंज के पलिया ​वार्ड में बना पुलिस लाइन का मुख्य द्वार। -संवाद

नया वेरिफाई, न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बाड़मेरPublished by:बाड़मेर ब्यूरोUpdated Thu, 18 Dec 2025 01:38 PM IST

ट्रांसफर गेट Civic Pollsसोना-चांदी में ऐतिहासिक उछालT20 WCबीवी ने मरवा डाला पतिRCB vs UPकौन है अरिहा शाह?यूपी में एसआईआरWest BengalयूपीBihar News

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बाड़मेरPublished by:बाड़मेर ब्यूरोUpdated Tue, 23 Dec 2025 02:42 PM IST

लॉग इन क्लिक, गडवार/चिलकहर। सरकार जहां एक ओर डिजिटल इंडिया और सुशासन का दावा करते है लेकिर ज़मीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। हालत यह है कि जन्म प्रमाणपत्र जैसे बुनियादी दस्तावेज़ को बनवाना में लोगों का एक से दो हजार रुपये खर्च करना पड़ रहा है। वहीं, तहसील व ब्लाक चक्कर काटना अलग से हो जा रहा है। लोगों का आरोप है कि जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए उनसे 1000 से लेकर 2000 रुपये तक की अवैध वसूली की जा रही है। कभी सर्वर डाउन, कभी बाबू साहब छुट्टी पर तो कभी दस्तावेज़ अधूरे बताकर वापस कर दिया जाता है। पीड़िता राजकुमारी देवी, ब्रजेश पांडेय, संतोष सिंह, पंकज गुप्ता आदि का कहना है कि दो महीने से दौड़ रहे हैं। हर बार कोई नई कमी निकाल देते हैं। आखिर में साफ़ बोल दिया गया कि 1500 रुपये दे दो, तभी बनेगा।

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