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💢दैनिक पैसे💢विस्तारFollow Usआगामी पंचायत चुनावों को लेकर बानसूर उपखंड में हलचल तेज हो गई है। इसी कड़ी में उपखंड प्रशासन ने ग्राम पंचायतों के वार्डों के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। राज्य सरकार से मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए उपखंड अधिकारी अनुराग हरित ने पंचायती राज अधिनियम 1994 के तहत उपखंड की 23 ग्राम पंचायतों में वार्डों के पुनर्गठन का प्रारूप आधिकारिक रूप से जारी कर दिया है। इस घोषणा के बाद पूरे क्षेत्र में चुनावी माहौल बन गया है, क्योंकि नए वार्ड बनने से कई राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। उपखंड अधिकारी अनुराग हरित ने बताया कि वार्डों का नया निर्धारण वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाकर किया गया है। प्रशासन ने कोशिश की है कि वार्डों का बंटवारा पूरी तरह न्यायसंगत हो और सभी वार्डों में जनसंख्या का संतुलन बना रहे।
️रिसीव ईज़ी,सूफी संत हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती के 814वें सालाना उर्स के मुबारक अवसर पर आज बुधवार को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर से दरगाह शरीफ में मखमली चादर और अकीदत के फूल पेश किए गए। इस अवसर पर दरगाह परिसर में आध्यात्मिक माहौल और अकीदतमंदों की मौजूदगी देखने को मिली।
'मैं मुंबई आऊंगा, हिम्मत है तो मेरे पैर...'India-US Tiesपीएम मोदी कार डिप्लोमेसीविवेकानंद यूथ अवॉर्डWest Bengal Politicsबैंकिंग सेक्टर में बड़ा बदलावदालमंडी में बुलडोजर एक्शनModi-Merz Meet LIVEIND vs NZUP
सर्वे, संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराजUpdated Tue, 13 Jan 2026 02:29 AM IST
सारमध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले में दिल दहलाने वाला मामला सामने आया है। झूठी शान बचाने के चक्कर में एक पिता ने अपनी 17 साल की बेटी की गला दबाकर हत्या कर दी। इसके बाद शव को फंदे पर लटकाकर बताया कि उसने सुसाइड कर लिया है। इसके बाद जल्दबाजी में अंतिम संस्कार कर दिया। किसी को बिना बताए उसकी अस्थियां भी विसर्जित कर दीं।
भाटापारा शहर में गौरी-गौरा विसर्जन कार्यक्रम के दौरान दो पक्षों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि मामला मारपीट में बदल गया। जानकारी के अनुसार, विसर्जन के दौरान असामाजिक तत्वों ने लाठी-डंडों, पत्थरों व अन्य वस्तुओं से हमला कर दिया, जिससे कई लोग घायल हो गए।
ऑनलाइन,
गेट सरकारी अस्पताल के अंदर खुली खिड़की से बिकती हैं दवाइयां
मोबाइल, बांदा। इंदौर में दूषित पानी के सेवन से मौतों के बाद भी जिम्मेदार चेत नहीं रहे हैं। शहर में 56 हजार परिवारों को शुद्ध पीने का पानी मुहैया कराने के दावे जमीनी सच्चाई के सामने तालमेल नहीं खा रहे। केन नदी व नलकूपों से पानी स्टोर करने के लिए बनी पानी की टंकियां सालों से साफ नहीं हुई। हालांकि किसी टंकी में मई तो किसी में अप्रैल महीने में सफाई का उल्लेख किया गया है।







