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💢ऑफर💢साररायपुर पुलिस ने नशे के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान ऑपरेशन निश्चय के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए गांजा के साथ एक महिला आरोपी को गिरफ्तार किया है।
️साप्ताहिक इनवाइट,विकासखंड मुख्यालय आवापल्ली में संचालित पोर्टाकेबिन विद्यालय की कक्षा छठवीं की छात्रा कुमारी मनीषा सेमला के आकस्मिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए बीजापुर जिला पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष एवं कांग्रेस पार्टी के युवा नेता कमलेश कारम ने इस घटना के लिए विद्यालय की अधिक्षिका को जिम्मेदार ठहराया है।
जिला पंचायत सीईओ के निवास में एसीबी की दबिश- फोटो : अमर उजाला
साइन अप बोनस, भाजपा पदाधिकारियों ने उच्चैन एसडीएम धारा मीणा के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।- फोटो : अमर उजाला
डॉ. गोविंद सिंह की लहार स्थित बहुचर्चित कोठी का गेट रास्ते पर नजर आ रहा है
पूजा अर्चना कर परिवार की सुख शांति के लिए की प्रार्थना
गेट, Donald TrumpIranCivic Pollsसोना-चांदी में ऐतिहासिक उछालबीवी ने मरवा डाला पतिT20 WCRCB vs UPकौन है अरिहा शाह?यूपी में एसआईआरWest Bengal
विशेष सब्सक्राइब सिकंदराबाद। दनकौर रोड पर अतिक्रमण को हटाने के लिए पीडब्ल्यूडी के नोटिस के विरोध में दनकौर तिराहे से लेकर नाले तक के व्यापारियों ने विरोध में अपने प्रतिष्ठानों को बंद कर उद्योग व्यापार मंडल के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन किया।
चरखी दादरी। दादरी जिले में भूजल का स्तर लगातार गिरता जा रहा है और इसके साथ ही पानी में फ्लोराइड व लवणीयता की मात्रा भी बढ़ चुकी है। हालात यह हैं कि जिले के बाढड़ा क्षेत्र को पहले डार्क जोन घोषित किया जा चुका है। हालांकि 2018 में किसानों की मांग और हल्के सुधार के साथ डार्क जोन से बाहर कर दिया था। पेयजल संकट इतना गहरा गया है कि अब शहर ही नहीं, गांवों में भी लोग आरओ और कैंपर से पानी खरीद कर पीने के लिए मजबूर हैं। बाढड़ा क्षेत्र में भूजल स्तर करीब 260 फीट नीचे पहुंच चुका है। लगातार दोहन और प्राकृतिक जल स्रोतों के खत्म होने से हालात और गंभीर हो गए हैं। दादरी जिले के अधिकतर क्षेत्रों में भूजल लवणीय और सोडिक पाया जा रहा है, जो सेहत के लिए बेहद नुकसानदायक है। विशेषज्ञों के अनुसार फ्लोराइड युक्त पानी लंबे समय तक पीने से हड्डियों और दांतों से जुड़ी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।
कलेक्ट लाइक, विस्तारFollow Usइंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों ने मध्यप्रदेश की जल गुणवत्ता जांच व्यवस्था की गंभीर पोल खोल दी है। इस घटना के बाद जांच की सुई सीधे लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग पर टिक गई है, जो प्रदेश में पेयजल और औद्योगिक जल की गुणवत्ता जांच का जिम्मा संभालता है। हैरानी की बात यह है कि प्रदेशभर में 155 प्रयोगशालाएं होने के बावजूद पूरे मध्यप्रदेश में सिर्फ तीन नियमित केमिस्ट पदस्थ हैं।







