इंस्टेंट शेयर
ऑनलाइन कम्पलीट
प्लेटिनम विज़िट, Inc
लाइक इंस्टेंट
💢मासिक पॉइंट्स💢कमेंटX😊अति सुंदर😎बहुत खूब👌अति उत्तम भाव👍बहुत बढ़िया..🤩लाजवाब🤩बेहतरीन🙌क्या खूब कहा😔बहुत मार्मिक😀वाह! वाह! क्या बात है!🤗शानदार👌गजब🙏छा गये आप👏तालियां✌शाबाश😍जबरदस्त
️सर्वे,सारभोपाल में इस साल चार दिन सरकारी अवकाश रहेंगे। इसमें मकर संक्रांति, महानवमी, अनंत चतुर्दशी और गैस त्रासदी की बरसी शामिल हैं।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पूर्णियाPublished by:पूर्णिया ब्यूरोUpdated Mon, 12 Jan 2026 07:32 PM IST
डायमंड ऑफर, Donald TrumpIranCivic Pollsसोना-चांदी में ऐतिहासिक उछालविक्रमादित्य सिंह की फेसबुक पर टिप्पणीT20 WCRCB vs UPकौन है अरिहा शाह?बीवी ने मरवा डाला पतिWest Bengal
😊अति सुंदर😎बहुत खूब👌अति उत्तम भाव👍बहुत बढ़िया..🤩लाजवाब🤩बेहतरीन🙌क्या खूब कहा😔बहुत मार्मिक😀वाह! वाह! क्या बात है!🤗शानदार👌गजब🙏छा गये आप👏तालियां✌शाबाश😍जबरदस्त
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भरतपुरPublished by:तरुणेंद्र चतुर्वेदीUpdated Fri, 07 Nov 2025 07:14 PM IST
अतिरिक्त ऐप, विस्तारFollow Usनक्सल प्रभावित क्षेत्रों में साहस, समर्पण और उत्कृष्ट पुलिसिंग का परिचय देने वाले मध्यप्रदेश पुलिस के 61 अधिकारियों और कर्मचारियों को बड़ी सौगात मिली है। पुलिस मुख्यालय, मध्यप्रदेश भोपाल ने बालाघाट जिले में नक्सल विरोधी अभियानों में उल्लेखनीय भूमिका निभाने वाले जवानों को क्रम से पूर्व पदोन्नति देने के आदेश जारी किए हैं। इसमें उप निरीक्षक, सहायक उपनिरीक्षक, प्रधान आरक्षक और आरक्षक स्तर के अधिकारी-कर्मचारी शामिल हैं। पुलिस मुख्यालय से जारी आदेश के अनुसार, 14 जून 2025 को बालाघाट जिले के थाना रूपझर क्षेत्र अंतर्गत पचमादर-कटंगीया पहाड़ी जंगल क्षेत्र में पुलिस बल द्वारा अपनी जान की परवाह किए बिना वांछित और सक्रिय नक्सलियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की गई थी। इस अभियान में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) से जुड़े हार्डकोर नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई कर सुरक्षा बलों ने बड़ी सफलता हासिल की थी।
कलेक्ट पॉइंट्स विस्तारFollow Usसुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें एक न्यायिक अधिकारी की बर्खास्तगी को रद्द कर दिया गया था। आरोप है कि उक्त अधिकारी ने वर्ष 2018 में ट्रेन यात्रा के दौरान एक महिला सहयात्री के सामने पेशाब किया और यात्रियों के साथ नशे की हालत में दुर्व्यवहार किया। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने इस आचरण को “घृणित” और “चौंकाने वाला” बताते हुए टिप्पणी की कि ऐसे मामले में अधिकारी को बर्खास्त किया जाना चाहिए था।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भरतपुरPublished by:हिमांशु प्रियदर्शीUpdated Sun, 16 Nov 2025 06:12 PM IST
डाउनलोड,







